स्कूलों का हाल: नया सत्र, नई उमंग, परेशानी वही पुरानी
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूलों में विद्यार्थियों के पहुंचते ही रौनक शुरू हो गई है। राजकीय स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का टोटा होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नये सत्र में स्कूलों की कमियों को उजागर करने के लिए मंगलवार को अमर उजाला की टीम राजकीय कन्या विद्यालय और राजकीय माध्यमिक विद्यालय बाल नारनौल पहुंची। इन दोनों ही राजकीय स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी मिली। यहां शहर और आसपास के हजारों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं।
कन्या विद्यालय में जमीन पर बैठीं थीं छात्राएं
कन्या विद्यालय में छात्राओं के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क उपलब्ध नहीं होने के कारण पांचवीं से आठवीं की छात्राओं को कमरों और बरामदे में टाट पट्टी पर बैठाया गया था। सफाई के अभाव में स्कूल के शौचालयों की हालात भी दयनीय नजर आयी। प्राथमिक स्तर की छात्राओं को भवन के पुराने जर्जर कमरों में ही पढ़ाया जा रहा था। स्कूल में छात्राओं के लिए पानी की उचित व्यवस्था की गई है। स्कूल में आरओ युक्त तीन से चार बड़ी पानी टंकी बनाई गई हैं। उनको सप्लाई से जोड़ा गया है। इस कारण स्कूल में पानी की समस्या देखने को नहीं मिली।
वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल
टीम ने सबसे बड़े राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल का दौरा किया। वहां सुविधाएं कम और खामियां अधिक देखने को मिलीं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल में विद्यार्थियों के लिए पीने के लिए केवल एक पानी की टंकी है। हालांकि प्रथम तल पर प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए प्लास्टिक की टंकी से जुगाड़ कर पानी की व्यवस्था की गई है। वह भी बिना ढक्कन के खुली रखी हुई थी। वहीं सफाई के अभाव में स्कूल के शौचालयों हालात अति दयनीय है। इतना ही नहीं स्टाफ के लिए भी स्कूल में अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों के साथ-साथ स्टाफ को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण आसपास का वातावरण दुर्गंधमय नजर आया। स्कूल के कई कमरों में पंखे भी खराब नजर आए। स्कूल की समस्याओं को लेकर टीम ने विद्यार्थियों से बातचीत की तो उन्हें खुलकर अपनी समस्या सामने रखी। राजकीय विद्यालय बाल के विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल में न तो पीने लायक पानी है, न ही कंप्यूटर शिक्षा। एजूसेट भी खराब ही पड़े हैं। इसके अलावा स्कूल में कमरों में कुछ पंखे टूटे हैं तो कुछ खराब पड़े है। ऐसे में उन्हें इस गर्मी में कभी कमरे से बाहर नीचे फर्श पर तो कभी कक्षा के अंदर ही गर्मी में पढ़ाई करनी पड़ती है। जबकि स्कूल में डेस्क पर्याप्त मात्रा में है।
दोनों स्कूल में भी मूलभूत सुविधाओं का टोटा
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल दोनों ही काफी पुराने स्कूल है। इनमें शहर और आसपास के गांवों के हजारों छात्र और छात्राएं पढ़ने आते हैं। पिछले कुछ समय से दोनों स्कूलों में पानी, शौचालय और डेस्क जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। प्रदेश के शिक्षामंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी भी इसी जिले से संबंध रखते हैं। इसके बावजूद भी दोनों स्कूलों में सुविधा कमी बनी हुई है।
कंप्यूटर लैब पर लटका ताला
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कंप्यूटर की शिक्षा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने सभी राजकीय विद्यालयों में कंप्यूटर लैब स्थापित की थी। वर्तमान में कई स्कूलों की हालात यह है कि कहीं कंप्यूटर लैब के लिए टीचर नहीं है तो कहीं विद्यार्थियों कंप्यूटर की शिक्षा ही नहीं दी जा रही है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल में स्थापित की गई कंप्यूटर लैब पर भी ताला लटका हुआ है।
वोकेशनल एजूकेशन लैब का निर्माण नौ माह से लटका
छात्राओं को वोकेशनल प्रशिक्षण के लिए राजकीय कन्या विद्यालय में वोकेशनल एजूकेशन लैब का निर्माण करवाया जा रहा है, लेकिन लैब के निर्माण के लिए दूसरी किश्त नहीं आने के कारण इसका निर्माण नौ माह से लटक गया है। इससे छात्राओं के लिए वोकेशनल प्रशिक्षण की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
नसीबपुर स्थित राजकीय स्कूल बारिश के पानी से बना तालाब
डीईओ नारनौल के गोद लिए नसीबपुर गांव में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय की हालात कुछ ठीक नहीं है। बारिश के मौसम में विद्यालय तालाब बन जाता है। गत दिनों जोरदार बारिश के बाद भी स्कूल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जब सुबह स्टाफ सदस्य स्कूल पहुंचे तो बारिश के पानी से स्कूल लबालब भरा हुआ था। हर कमरे में पानी था। मुख्य अध्यापक कार्यालय हो या फिर क्लास रूम। हर जगह पानी ही पानी नजर आया। ऐसे में बारिश के मौसम में विद्यार्थियों को भारी परेशानी होती है।
बच्चों के बैठने के लिए कुछ डेस्क कार्यक्रम हाल में लगाई गई हैं। इस कारण क्लास रूम में डेस्क की कमी हो गई है। डेस्क की कमी और वोकेशनल एजूकेशन लैब निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। बजट मिलते ही विद्यालय की सभी कमियों को पूरा करवाया जाएगा। - पवन भारद्वाज प्राचार्य, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय