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निजी प्रयोगशालाओं पर स्वास्थ्य विभाग की टीम का छापा, अनियमितताएं मिलीं

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को निजी प्रयोगशालाओं में छापामारी कर रिकार्ड खंगाला। जांच टीम ने खामियां मिलने पर प्रयोगशाला संचालकों को तीन दिन में सुधार करने का अल्टीमेटम दिया। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने स्पष्ट कहा है कि यदि तय सीमा में अव्यवस्थाओं को दूर नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सिविल सर्जन के निर्देशों पर छह सदस्यों की टीम ने जिले की प्रयोगशालाओं में जांच की। यहां टीम ने हरियाणा सरकार के लैब से संबंधित मानकों को जांचा। लैबों में कार्य कर रहे स्टाफ और डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता की भी जांच की गई। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने बताया कि टीम ने वेलकेयर डायग्नोस्टिक लैब, डायनाकेयर लैब, दीप केयर कलेक्शन सेंटर, अल्ट्रा विजन पैथ लैब, सीआरएल लैब, ऑरेंज लैब, कृपाल लैब, कल्पवृक्ष लैब, ओरबिट लैब, लाल पैथ लैब, बंदा बहादुर लैब सहित कई में जांच की। इनमें काफी अनियमितता पाई मिली हैं।
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इन खामियों और योग्यता से संबंधित कागजात को पूरा करने के लिए सभी को तीन दिन का समय दिया है। इस दौरान लैब तकनीशियनों को बायोमेडिकल वेस्ट के सही डिस्पोजल के बारे में बताया गया। प्रदेश में क्लीनिकल एस्टेक्लिसमेट एक्ट लागू नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रयोगशाला में कार्य करने वाले तकनीशियन की शिक्षा बीएससी लैब तकनीशियन आवश्यक है। इसके अलावा प्रयोगशाला पर डॉक्टर का होना भी अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि बिना पंजीकृत डॉक्टर, लैब तकनीशियन के चल रही लैबों को आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सभी निजी अस्पतालों में चल रही लैब को भी इन आदेशों की पालाना के लिए आईएमए की मीटिंग में निर्देश दे दिए गए हैं।

कागजी लैब तकनीशियनों पर गिरेगी गाज
सूत्रों की मानें तो शहर की अधिकांश लैब पर बगैर लैब तकनीशियन की डिग्री वाले युवाओं को कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए बाकायदा जांच केंद्र मोटी फीस वसूलता है और भविष्य में नौकरी देने की भी गारंटी देता है।
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कोर्स पूरा करने के बाद लैब संचालक अपने यहां कुछ रुपयों में नौकरी भी दे देते हैं। यदि योग्य स्टाफ रखा जाए तो उनको अधिक वेतन देना पड़ता है, इससे बचने के लिए लैब संचालक अपने ही प्रशिक्षण किए स्टाफ को रख लेते हैं।
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