ब्रेन डेड व्यक्ति की किडनी, आंखें और दिल के वॉल्व किए दान
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
55 वर्षीय देवेंद्र सचदेवा ने सोचा भी नहीं होगा कि नियमों को तोड़ कर सड़क पर बनाया गया एक स्पीड ब्रेकर उनकी जान ले लेगा। अव्यवस्थाओं ने भले ही उनकी जान ले ली, लेकिन देवेंद्र सचदेवा मृत्यु के बाद भी मानवता की एक मिसाल बन गए हैं। सड़क दुर्घटना में ब्रेन डैड होने के बाद दिल्ली सफदरजंग ट्रॉमा सेंटर की टीम ने मृतक के परिजनों की इच्छा के बाद उनके दिल के वॉल्व, दो किडनी और दोनों आंखों को किसी अन्य के शरीर में प्रत्यारोपित कर पांच अज्ञात लोगों को नया जीवन दिया है।
पालिका बाजार एसोसिएशन के प्रधान गुलशन निझावन ने बताया कि सेक्टर 14 निवासी मृतक देवेंद्र सचदेवा बाबा लक्ष्मणपुरी डेरा के महामंडलेश्वर कपिलपुरी के जीजा थे। वह 25 नवंबर को रात 12 बजे बंगला साहिब गुरुद्वारे में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद दुपहिया वाहन पर घर जा रहे थे। सेशन हाउस के सामने हाल ही में सड़क पर नये स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं, इन पर उनका वाहन उछल गया और वह वहां गिर गए। जानकारी मिलने पर परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे और उनको लेकर पीजीआई आपात विभाग पहुंच गए। यहां सीटी स्कैन करने के बाद डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति को गंभीर बताया। यहां से परिजन मरीज को शीला बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए। डॉक्टरों ने बताया कि सुबह मरीज का आपरेशन करना पडे़गा। इसके लिए मरीज को एक अन्य निजी अस्पताल ले जाया गया।
यहां साढे़ तीन घंटे चले आपरेशन में डॉक्टरों ने पाया कि मरीज के ब्रेन का अधिकांश हिस्सा ऑक्सीजन न मिलने के चलते डैड हो गया है। 27 नवंबर को निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी मरीज के ब्रेन को डैड घोषित कर दिया। इसके बाद 28 को परिवार के लोगों ने तय किया कि वह अपने मरीज के शरीर के अंगों को दान कर देंगे। इस संबंध में दिल्ली सफदरजंग ट्रॉमा सेंटर की अंगदान करने वाली टीम को संदेश भेजा गया। 30 दिसंबर की शाम डॉक्टरों ने मरीज को पूर्ण रूप से ब्रेन डैड घोषित कर दिया। इसके बाद सायं अंगदान की प्रक्रिया शुरू की गई। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को इसकी जानकारी दी गई कि देवेंद्र की दो किडनी, दो आंखें और दिल का वॉल्व किसी अन्य मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया गया है। इसके बाद एक दिसंबर को दोपहर अस्पताल ने देवेंद्र का शव परिजनों को सौंप दिया। मृतक का दाह संस्कार शुक्रवार को शीला बाईपास स्थित राम बाग में साढे़ तीन बजे किया गया। इसमें शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे। देवेंद्र अपने पीछे दो पुत्र, एक पत्नी, दो भाई छोड़ गए हैं।