पंचायत चुनाव में नामांकन करते समय बिजली निगम से बिल के बकाये की एनओसी लेने का नियम लागू होने के बाद डिफाल्टरों व बकायेदारों की भागदौड़ शुरू हो चुकी है।
हालात ऐसे है कि कभी बिजली बिल जमा नहीं करने वाले भी निगम के दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं और अपना बकाया बिजली बिल जमा करके एनओसी लेने की जुगत में लगे हैं।
यही कारण है कि जिले में चौधर की चाहत रखने वाले 356 बकायेदारों व डिफाल्टरों ने 43 लाख 19 हजार रुपये जमाकर बिजली निगम से एनओसी कटवाई है।
जिस तरह से चुनाव नामांकन की तारीख बीत रही है, उसी तरह से एनओसी लेने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है और बिजली निगम भी इसका खूब फायदा उठाने में लगा हुआ है।
सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक पात्रता रखने के साथ ही बिजली निगम, बैंक से बकाया नहीं होने की एनओसी जारी कराने का नियम लागू किया है और यह एनओसी नामांकन करते समय देनी होगी। यह नियम लागू होने से आज तक बिल नहीं भरने वाले भी खुद ही निगम कार्यालय में दौड़ लगाने लगे हैं। वहीं बिजली निगम को बड़ा फायदा हुआ है, जिनको बिल वसूली के लिए डिफाल्टरों व बकायेदारों के पास तक जाना भी नहीं पड़ रहा है। बिजली निगम अधिकारियों के अनुसार जहां छूट देने के बाद भी इतनी वसूली नहीं होती थी, वहां अब बिना छूट के खूब वसूली हो रही है। आंकड़ों को देखा जाए तो पूरे जिले में 356 बकायेदारों व डिफाल्टरों ने 43 लाख 19 हजार रुपये जमा कराए हैं। इसमें भी डिवीजन एक में सबसे अधिक 206 डिफाल्टरों व बकायेदारों ने 22.77 लाख जमा कराकर एनओसी जारी कराई है। वहीं डिवीजन दो में 126 ने 17.54 लाख रुपये जमा कराए है तो सिटी डिवीजन से जुड़े गांवों के 24 ने 2.88 लाख जमा कराकर एनओसी जारी कराई है। ऐसा नहीं है कि यह सिलसिला अभी रुक गया है, बल्कि बकाया बिल जमा कराकर एनओसी लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब खुद बिजली निगम के अधिकारियों को लगने लगा है कि जिस तरह से बकायेदार व डिफाल्टरों ने बिल जमा कराना शुरू किया है, उससे चुनाव नामांकन पूरे होने तक निगम की बड़ी वसूली हो जाएगी।
सरकार की ओर से पंचायत चुनाव लड़ने के लिए बिजली निगम से बकाये बिल की एनओसी लेने का नियम लागू करने से वसूली तेजी से बढ़ी है। निगम कार्यालयों में बकायेदार व डिफाल्टर खुद ही बिल जमा कराने आ रहे हैं, क्योंकि उनको नामांकन के लिए एनओसी की जरूरत है। वीएस मान, एसई बिजली निगम