फ्लैग : जाट आरक्षण दंगों में पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार की भूमिका की जांच का मामला
हेडिंग : प्रो. वीरेंद्र के खिलाफ चार्जशीट तैयार, अदालत में दाखिल करने के लिए नहीं मिली सरकार से अनुमति
: सिविल लाइन थाना प्रभारी को मामले में दाखिल करनी है चार्जशीट
: थाना प्रभारी बोले-देशद्रोह की धारा होने के कारण सरकार की अनुमति अनिवार्य
: अब 17 नवंबर को होगी मामले में एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सरकार की अनुमति न मिलने के कारण पुलिस शुक्रवार को अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। अब अदालत ने पुलिस को 17 नवंबर तक का समय दिया है। जांच अधिकारी की तरफ से सरकार को अनुमति के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
बता दें कि फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में हिंसा भड़क उठी थी। भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन ने शिकायत दी कि दंगों को भड़काने में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह का हाथ है। इसके लिए एक विवादित ऑडियो टेप का हवाला दिया गया था, जिसमें आंदोलन को दूसरी जगह शुरू करने की बात कही जा रही थी। टेप के आधार पर पुलिस ने पवन की शिकायत पर प्रोफेसर वीरेंद्र व दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया था।
अदालत को देनी पड़ रही तारीख पर तारीख
शुक्रवार सुबह प्रो. वीरेंद्र सिंह ने एसीजेएम योगेश चौधरी की अदालत में पहुंच कर हाजिरी लगाई। उनके वकील आरसी दलाल ने बताया कि पुलिस ने कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की। इससे साफ है कि पुलिस के पास प्रोफेसर वीरेंद्र के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। अब मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
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डीएसपी की तरफ से मामले की जांच पूरी की जा चुकी है। चार्जशीट भी तैयार है। देशद्रोह की धाराएं होने के कारण मामले में चार्जशीट सरकार की अनुमति से ही दाखिल की जा सकती है। सरकार को अनुमति के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण पुलिस शुक्रवार को अदालत में आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी।
-श्रीभगवान, थाना प्रभारी सिविल लाइन