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गाड़ियों को धोने के लिए सर्विस स्टेशनों, घरों में प्रतिदिन बहाया जा रहा एक लाख लीटर पानी

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गाड़ियों को धोने के लिए सर्विस स्टेशनों, घरों में प्रतिदिन बहाया जा रहा एक लाख लीटर पानी
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बहादुरगढ़।
शहर में बढ़ती गर्मी में जहां लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा वहीं सर्विस स्टेशनों और घरों में गाड़ियों को धोने में हर रोज एक लाख लीटर से अधिक पानी बहाया जा रहा है। पानी की किल्लत से परेशान लोगों का आक्रोश गर्मी के इस सीजन में भी कई बार सामने आ चुका है। बीते 15 दिन में ही विकासनगर, बहराणियां बस्ती, शास्त्रीनगर व विजयनगर समेत कई कालोनियों के लोग रोड जाम या प्रदर्शन कर चुके हैं।
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शहर में आजकल पीने के पानी की किल्लत से हाहाकार मचा है। नगर की किसी भी कालोनी के लोगों को जलापूर्ति विभाग के जलघर से पीने का पानी हर रोज नहीं मिल रहा। दूसरी ओर शहर की कई कालोनियों ऐसी हैं जहां पर्याप्त स्वच्छ पेयजल मिलता हो। जब पानी आता है तो तमाम परिवारों को दो-चार दिन के लिए पानी का स्टाक करना पड़ता है। कई कालोनियों में तीन-चार दिन में भी पानी नहीं आता। जलघर के पांचों टैंकों में शनिवार को भी पूरा पानी नहीं था। बहादुरगढ़ शहर में 45 सर्विस स्टेशन चालू हालत में हैं। एक स्टेशन में कम से कम 10 गाड़ियां हर रोज धोई जाती हैं और एक गाड़ी को धोने में करीब 150 लिटर पानी खर्च होता है। इस प्रकार 450 गाड़ियों को धोने में हर रोज करीब 67500 लीटर पानी खर्च हो जाता है। इसके अलावा घरों में भी हर रोज करीब 200 लोग अपनी गाडिय़ों को धोते हैं। कुल मिलाकर करीब एक लाख लीटर पानी गाड़ियों को धोने में बहा दिया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता राहुल का कहना है कि लोग किफायत से पानी इस्तेमाल करें तो इसमें 50 हजार लीटर से अधिक पानी बचाकर पीने के लिए उपयोग हो सकता है। हालांकि कुछ सर्विस स्टेशन ऐसे भी हैं जो भूजल का इस्तेमाल करते हैं। सरकारी पानी का इस्तेमाल करने वाले कई सर्विस स्टेशनों में जलापूर्ति विभाग के कामर्शियल कनेक्शन तक नहीं लगे हैं। हालांकि जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता श्रीकिशन दहिया का कहना है कि इनके पंजीकरण की जिम्मेवारी विभाग की नहीं है। नगर के लोगों को हर रोज नहर से लगभग 56 लाख लीटर पानी चाहिए। लेकिन बहादुरगढ़ वाटर सप्लाई चैनल से फिलहाल लगभग 36 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। इसमें से भी 18 लाख लीटर पानी शहर से सटे गांवों को दिया जाता है। यानी हर रोज 20 लाख लीटर अधिक पानी मिले तब सभी लोगों को पीने का पर्याप्त पानी मिल सकता है। फिलहाल 200 से अधिक ट्रैक्टर-टैंकर या टैंपो-टैंकर नगर में 5 से 10 तक फेरे लगाकर पानी की आपूर्ति करते हैं। ये टैंकर शहर व खेतों में लगे नलकूपों पानी भरकर लाते हैं। शहर के अधिकतर हिस्सों में भू-जल खारा है। इसलिए लोग पीने के पानी के लिए जलापूर्ति विभाग के पानी पर निर्भर हैं। जिन लोगों को जलापूर्ति विभाग से नहरी पानी नहीं मिल पाता वे आरओ प्लांट संचालकों से खरीदकर पानी पीते हैं। फिलहाल आरओ वाटर पानी पानी, सर्विस व जगह के अनुसार 12 से 25 रुपये प्रति 15 लीटर में बिक रहा है। हालांकि अधिकतर सर्विस स्टेशन संचालकों का कहना है कि वे सरकारी पानी का घरेलू कनेक्शन के जरिए दोहन नहीं करते, बल्कि सभी ने अपने समर्सिबल पंप लगवा रखे हैं। लेकिन सर्विस स्टेशन संचालकों की यह बात पूरी तरह गले नहीं उतरती। लाइनपार इलाके में तो भूजल खारा है और खारे पानी से गाड़ी को कोई नहीं धुलवाना चाहता।
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