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संस्कृत कॉलेज की जमीन पर खोला जाएगा पहला कन्या महाविद्यालय

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संस्कृत कॉलेज की जमीन पर खोला जाएगा केवल कन्या महाविद्यालय
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चरखी दादरी।
बाबा स्वामी दयाल धाम पर रविवार को सर्वखाप महापंचायत आयोजित की गई। इसमें 21 सदस्यीय कमेटी ने रोहतक रोड स्थित हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय की जमीन पर महिला कन्या महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया। इस मसले पर गठित 21 सदस्यीय कमेटी ने मौजूदा हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय की जमीन एवं भवन का किसी समाज हित के उद्देश्य से इस्तेमाल के लिए मंथन किया गया। खापों व सामाजिक संगठनों से चुने कमेटी के प्रतिनिधि यहां जिले का पहला कन्या महाविद्यालय खोलने के पक्ष में है और जमीन मालिकों ने इसे सरकार को सुपुर्द करने का आश्वासन भी दिया है। पंचायत के दौरान निर्णय लिया गया कि खापें शहर का पहला महिला महाविद्यालय खोलने के लिए चार फरवरी को मुख्यमंत्री के भिवानी आगमन पर मांगपत्र सौंपेंगी। महापंचायत की अध्यक्षता फौगाट खाप प्रधान रामदास फौगाट ने की। वहीं जिले के सभी खापों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
गौरतलब है कि हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय की जमीन के के संबंध में सात जनवरी को महाविद्यालय परिसर में खाप फौगाट प्रधान रामदास की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई थी। चार घंटे की पंचायत में महाविद्यालय की जमीन को उपयोग में लाने के लिए 21 सदस्यीय कमेटी गठन करने का निर्णय लिया गया था। रविवार को बाबा स्वामी दयाल धाम पर आयोजित सर्वखापीय एवं सामाजिक संगठनों की बैठक में कमेटी में शामिल लोगों के नामों की घोषणा की गई। खाप प्रधान रामदास ने बताया इस कमेटी में सभी खापों व सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। खाप सचिव बलवंत नंबरदार ने बताया कि कमेटी में कार्यकारी प्रधान रिटायर्ड प्राचार्य अमरचंद मानकावास, सचिव प्रभुराम गोदारा हवेली खाप से, खजांची पार्षद रविंद्र गुप्ता, सदस्य भूपेंद्र चरखी, तेजपाल डोहकी, सत्यादेवी समसपुर, ओमप्रकाश पंचगांवा बाढड़ा, प्रतिनिधि निहाल सिंह के परिवार से एडवोकेट संजीव तक्षक, सोमबीर सांगवान प्रधान सांगवान खाप, मॉ. टेकचंद बादल, रामसिंह बलकरा, शमशेर सिंह खातीवास, राजकुमार जांगड़ा प्रधान काठमण्डी, भोजराज शास्त्री प्रधान ब्राह्मण सभा दादरी, सतगामा खाप से सरपंच नरेश कन्हेटी, मॉ. महावीर रानीला, प्रधान श्योराण खाप बिजेन्द्र बेरला, पूर्व चेयरमैन छेलू राम भोपाली, देवदत्त आर्य, चिड़िया खाप से आजाद सिंह आर्य व फौगाट खाप से प्रधान रामदास को चुना गया।
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कमेटी सदस्यों ने बताया कि जमीन मालिकों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि महाविद्यालय की जमीन वो सरकार को देने के लिए तैयार हैं, बशर्तें सरकार यहां कन्या महाविद्यालय ही खोलें। कमेटी को जमीन मालिकों ने आश्वासन दिया कि अगर किसी कागजी कार्रवाई या फिर अन्य काम के लिए उनकी जरूरत पड़ेगी तो वो इसके लिए तैयार हैं। इसके बाद इस मांग को सीएम मनोहर लाल के सामने रखने का फैसला भी सर्वसम्मति से लिया गया। वक्ताओं ने बताया कि सन 1946 में तत्कालीन शिक्षा व समाज से जुड़े व्यक्तियों ने क्षेत्र में शिक्षण संस्था बनाए जाने पर विचार किया था। उस समय इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल बिड़ला(शिक्षामंत्री) गांव भागवी निवासी निहाल सिंह तक्षक थे। हालांकि उस समय शिक्षण संस्थाओं पर बैन था। इसके बावजूद शिक्षण संस्था खोलने के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी जिसने संस्कृत महाविद्यालय की बिल्डिंग का निर्माण करने की रूपरेखा तय की थी। 2012 में क्षेत्र के कुछ लोगों ने इस शिक्षण संस्था की जमीन को लेकर कोर्ट में केस दायर कर दिया था। अब पिछले दिनो कुछ मौजिज लोगों ने आवाज उठाई कि इस शिक्षण संस्था में छात्रों की संख्या ही नहीं रही तो इस भवन एवं जमीन का कोई और नई शिक्षण संस्था स्थापित करने या अन्य किसी समाज हित के उद्देश्य से सदुपयोग किया जाए तो बेहतर रहेगा। इस पर इस विषय को सर्वजातीय एवं सर्वखाप महापंचायत बुलाए जाने का निर्णय लिया गया। महापंचायत में सांगवान खाप के प्रधान सोमबीर सांगवान, सचिव नरसिंह डीपीई, फौगाट खाप सचिव बलवंत सिंह नंबरदार, डॉ. सुभाष, सुमेर फौगाट, सुरेश फौगाट, सीताराम, श्योराण खाप से कमल सिंह मांढ़ी, छेलू राम भोपाली, सतगामा खाप प्रधान ओमप्रकाश, चिड़िया खाप से राजबीर शास्त्री ने अपने विचार रखें।
चंदा एकत्र कर शुरू किया था महाविद्यालय
हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय के निर्माण के लिए लोगों ने चंदा दिया था और पांच सदस्यीय कमेटी में निहाल सिंह तक्षक, राजा महताब सिंह, मास्टर लज्जेराम समसपुर, शिवचरण डोहकी, हेतराम चरखी शामिल हुए थे। इन पांचों व्यक्तियों ने क्षेत्र में शिक्षण संस्था स्थापित करने के लिए प्रयास शुरू किए। लोगों सेे चंदा एकत्र कर शिक्षण संस्था भवन निर्माण की रूपरेखा तैयार हुई। इस प्रकार 1950-51 में शहर के रोहतक रोड स्थित जमीन में हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय के लिए भवन बनाया गया ताकि शिक्षा को बढ़ावा दिया सके। 1950 के बाद यहां करीब 20 साल तक नियमित रूप से कक्षाएं चलती रही। तत्पश्चात सन 1975 में यह भवन आर्य समाज से जुड़े लोगों व अन्य व्यक्तियों को सौंप दिया गया ताकि संस्था को यहां जारी रखा जा सके।
क्या है मामला
सन 1946 में तत्कालीन शिक्षा व समाज से जुड़े मौजिज व्यक्तियों ने क्षेत्र में शिक्षण संस्था बनाए जाने पर विचार किया था। उस समय इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल बिड़ला (शिक्षामंत्री) गांव भागवी निवासी निहाल सिंह तक्षक थे। हालांकि उस समय शिक्षण संस्थाओं पर बैन था। इसके बावजूद शिक्षण संस्था खोलने के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी जिसने संस्कृत महाविद्यालय की बिल्डिंग का निर्माण करने की रूपरेखा तय की थी। इसके निर्माण के लिए लोगों ने चंदा दिया था। इस प्रकार 1950-51 में शहर के रोहतक रोड स्थित करीब साढ़े छह एकड़ जमीन में हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय के लिए भवन बनाया गया ताकि शिक्षा को बढ़ावा दिया सके। 1950 के बाद यहां करीब 20 साल तक नियमित रूप से कक्षाएं चलती रही। तत्पश्चात सन 1975 में यह भवन आर्य समाज से जुड़े लोगों व अन्य व्यक्तियों को सौंप दिया गया ताकि संस्था को यहां जारी रखा जा सके। 2010 में इस महाविद्यालय को संचालित करने के लिए नई कमेटी भी बनाई गई जिसकी देखरेख में यह महाविद्यालय चलता रहा। बाद में इस महाविद्यालय में छात्रों की संख्या धीरे-धीरे कम होती चली गई। इसके बाद 2012 में इसकी भूमि पर मालिकाना हक को लेकर विवाद उभरा और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा। कोर्ट का इस संबंध में पांच सदस्यीय कमेटी के प्रतिनिधियों के हक में फैसला आया। समाज के चंदे से निर्मित बिल्डिंग को सामाजिक हित में उपयोग लाने के लिए सर्वखापीय पंचायत गत सात जनवरी को भी आयोजित की गई थी जिसमें 21 सदस्यीय कमेटी बनाने का फैसला लिया गया।
लड़कियों का स्कूल या कालेज हो स्थापित: आचार्य ऋषिपाल
::: हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संस्था कमेटी के पदेन सदस्य आचार्य ऋषिपाल का कहना है कि उन्होंने ही यह पंचायत बुलाई थी ताकि सब लोगों के सहयोग यह शिक्षण संस्था आगे बढ़े। उनका कहना है कि यहां लड़कियों का स्कूल व कॉलेज स्थापित कर दिया जाए तो और भी बेहतर होगा। वे महापंचायत के इस फैसले से पूरी तरह से सहमत हैं।
बाक्स: मिल-जुलकर लोग शुरू कई शैक्षणिक संस्था: एडवोकेट संजीव
==गांव भागवी निवासी निहाल सिंह तक्षक के पौत्र एडवोकेट संजीव तक्षक गुड्डू का कहना है कि महाविद्यालय का निर्माण समाज से चंदा एकत्रित कर करवाया गया था। हम भी चाहते हैं कि यहां कोई सरकारी महाविद्यालय ही खोला जाए। संस्था की प्रगति के लिए समाज के अच्छे लोगों को आगे आने चाहिए।
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वर्सन-
जमीन मालिकों ने 21 सदस्यीय कमेटी को कन्या महाविद्यालय खोलने के लिए जमीन देने का आश्वासन दिया है। कागजी कार्रवाई के लिए उन्होंने एक माह का समय मांगा है। मुख्यमंत्री से मांग करेंगे की यहां आर्य कन्या महाविद्यालय खोला जाए। जिले में कन्या महाविद्यालय की इस समय बेहद जरूरत है।
रामदास फौगाट, फौगाट खाप प्रधान
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