संरक्षण और रखरखाव के अभाव में जर्जर हुई रूदड़ोल हवेली
चरखी दादरी।
गांव रूदडौल में सोमवार को शेरे जंग पीरदान के वंशजों की बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता राष्ट्रवादी चिंतक एवं हिंदुस्तान गौरव अवार्ड से सम्मानित महीपाल आर्य ने की।
इस अवसर पर महीपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार हरियाणा में ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को चिह्नित कर उन्हें धरोहर के रूप संरक्षित की बात कह रही है। गांव रूदड़ोल में भी सात चौक व तीन दरवाजों वाली पुरानी हवेली ऐेतिहासिक इमारत के रूप में मौजूद है। महीपाल आर्य ने बताया कि गांव रूदड़ौल सन 1414 में यह गांव बसा था। उन्होंने बताया कि दो एकड़ जमीन में बनी इस अनूठी हवेली का निर्माण शेर-ए-जंग पीरदान विजयरणियां ने सन 1853 के बीच 1858 के बीच करवाया था। उन्होंने बताया कि जींद रियासत के समय श्योलाल विजयरणियां जो उस समय जिला दादरी के सबसे पहले मजिस्ट्रेट थे इसी इमारत में कचहरी लगाकर जनता को न्याय प्रदान करते थे। इस इमारत के दो मुख्य द्वार हैं। एक उत्तर और दूसरा दक्षिण दिशा में है। इसके अतिरिक्त तीसरा दरवाजा भी है जो इन दोनों द्वारों को स्वतंत्र रूप से आपस में मिलाता है। इसके साथ ही वह ऊंचा चबूतरा भी है।
महीपाल आर्य ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक इमारत है जो राजकीय देखरेख एवं संरक्षण के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है। इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है ताकि आने वाली पीढिय़ों को बीते इतिहास का ज्ञान बना रहे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सहयोग दे तो इसे पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किये जाने की संभावनाएं मौजूद हैं। बैठक में सेवानिवृत्त डीएसपी भगवान सिंह, पूर्व सैनिक शमशेर सिंह, महासिंह, नेहरू, सूबेदार सुरेंद्र सिंह, सूबेदार वेदप्रकाश सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।