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जिले के 40 स्कूलों ने पूरे नहीं किए सीबीएसई के मानक, नए सिरे से परिणाम तैयार कर भेजना होगा आज

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कोरोना काल में कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को बगैर परीक्षा पास करने के फैसले के बाद स्कूलों में बेहतर परिणाम की होड़ लग गई है। यही वजह है कि सीबीएसई ने प्रदेश के 797 स्कूलों के भेजे गए परिणाम पर रोक लगा दी है। इसकी वजह बोर्ड के तय मानकों की अनदेखी बताई जा रही है। इसमें जिले के 40 स्कूल भी शामिल हैं। अब इन स्कूलों को फिर से तय मानकों के तहत परिणाम तैयार कर बोर्ड को भेजना होगा। इसके लिए 17 जुलाई तक का समय दिया गया है।
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महामारी के कारण सीबीएसई ने दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को बगैर परीक्षा लिए ही पास करने का फैसला लिया है। विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन (कक्षा में लिया गया टेस्ट या प्री-बोर्ड एग्जाम) व स्कूल के 10वीं कक्षा के तीन साल के परिणाम के आधार पर अंक दिए जाने हैं। इन मानकों के हिसाब से ही स्कूलों को परिणाम तैयार कर बोर्ड में भेजा जाना था। पिछले दिनों सभी स्कूलों ने यह काम पूरा कर दिया था। अब बोर्ड ने प्रदेश के 797 स्कूलों के परिणाम पर आपत्ति जताते हुए रोक लगा दी है। साथ ही उन्हें 17 जुलाई तक नए सिरे से तय मानकों के तहत परिणाम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिले के 40 स्कूल भी शामिल हैं।
स्कूूलों में बेहतर परिणाम पाने की होड़ कुछ इस तरह लगी कि अपने मेधावियों को अच्छे अंक देने में मानकों को ही भुला दिया गया। ज्यादातर स्कूलों ने कमजोर बच्चों के हिस्से का अंक मेधावियों के खाते में डाल दिए। इस पर बोर्ड ने आपत्ति जताते हुए सभी विद्यार्थियों को बोर्ड की ओर से विषयानुसार निर्धारित अंक सीमा के हिसाब से परिणाम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को शनिवार शाम तक हर हाल में नए सिरे से परिणाम तैयार कर बोर्ड को भेजना होगा। इसके लिए बोर्ड ने पोर्टल ओपन कर दिया है।
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यह है परिणाम तैयार करने का मानक
सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध एक स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि परिणाम तैयार करने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं। इसके तहत दसवीं कक्षा के आंतरिक मूल्यांकन व स्कूल के पिछले तीन साल के बेहतर परिणाम के आधार पर अंक दिए जाने हैं। इसमें आंतरिक मूल्यांकन के 20 अंक व शेष 80 अंक थ्योरी के दिए जाएंगे। यही नहीं, बोर्ड ने विषयानुसार विद्यार्थियों को अंक देने की अधिकतम सीमा भी तय की है। इसके तहत 70 से 80, 60 से 70, 50 से 60, 40 से 50, 26 से 40 अंकों के निर्धारण की सीमा तय की गई है। परिणाम तैयार करते समय इन सभी का ध्यान रखना होगा।
बोर्ड ने परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी स्कूलों को दी है। इसके लिए बोर्ड ने मानक तय किए हैं। इसी के आधार पर परिणाम तैयार करना है। कुछ स्कूलों के परिणाम में किन्हीं कारणों से मानक छूट गए। उन्हें फिर से सुधार का अवसर दिया गया है। वे दोबारा परिणाम तैयार कर भेजेंगे। इसके लिए पोर्टल ओपन हो गया है।
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- हरि किशोर सिंह, शहरी समन्वयक, सीबीएसई
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