शह के बहुचर्चित एलिवेटिड ट्रैक से विस्थापितों के पुनर्वास पर शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई केबिनेट की मीटिंग में फाइनल मोहर लगा दी। अब बिजली निगम 2177 वर्ग गज और पीजीआईएमएस 7400 वर्गगज जमीन नगर निगम को ट्रांसफर करेगा। इसके बाद निगम पावर हाउस चौक पर दुकान के लिए जमीन और चिन्नोट कालोनी के साथ लगती जमीन में विस्थापितों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराएगा। इतना ही नहीं, केबिनेट ने शांतमई चौक व भिवानी स्टैंड पर प्रस्तावित ट्रिपल पी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर मोहर लगा दी।
गोहाना-रोहतक रेलवे लाइन पर गांधी कैंप के बीचोंबीच एलिवेटिड ट्रैक बनाया जा रहा है। इसके चलते 53 के करीब दुकानें व मकान प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि नगर निगम की प्लानिंग है कि एलिवेटिड ट्रैक के साथ-साथ एक सड़क भी निकाली जाए। रेलवे ने पिछले माह ट्रैक के निर्माण के लिए निर्माण में बाधा बनी दुकानों व मकानों को तोड़ दिया। चुनावी साल में लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। तब सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने आश्वासन दिया था कि विस्थापितों को सही जगह पर न केवल दुकानें मिलेंगी, बल्कि पुनर्वास भी किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम को हिदायत दी गई कि सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा जाए। जिसमें बताया जाए कि कैसे प्रभावित लोगों का पुनर्वास होगा। आयुक्त आरएस वर्मा और डीटीपी केके वार्ष्णेय दो दिन से चंडीगढ़ में रहे और एक प्रोजेक्ट तैयार किया। इसमें बताया गया कि प्रभावित लोगों को पावर हाउस चौक पर बिजली निगम की जमीन में दुकानें दी जा सकती हैं, जबकि चिन्नोट कालोनी के साथ लगती पीजीआईएमएस की जमीन में मकान बनाए जा सकते हैं। इसके लिए बिजली निगम से 2177 वर्गगज और पीजीआईएमएस से 7400 वर्गगज जमीन ली जाए। शुक्रवार को केबिनेट की मीटिंग में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने में व्यापारी नेता राजेश लुंबा ने मंत्री और उनके बीच एक कड़ी की भूमिका अदा दी।
वर्जन
सीएम ने शहर के व्यापारियों और ट्रैक से विस्थापित लोगों की मांग पूरी कर विशेष तोहफा दिया है। लोगों को पहले ही वादा किया था कि उन्हें प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सरकार उनके हर हित को लेकर चिंतित है।
मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री एवं स्थानीय विधायक