प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति
---
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान तो पीजीआई ने शुरू की जांच
- पीड़ित ने उठाया सवाल, जूनियर कैसे कर सकता है अपने सीनियर की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद पीजीआईएमएस प्रशासन ने एक बाद फिर ईशा अली के केस की सुनवाई शुरू की तो पहले दिन ही जांच सीनियर-जूनियर डॉक्टर के चक्कर में उलझ गई। पीड़ित ने जांच टीम में शामिल एक डॉक्टर के सवालाें पर कहा कि वह आरोपी डॉक्टर के जूनियर हैं, वह अपने सीनियर की क्या जांच करेंगे और क्या उसे न्याय देंगे। इस मामले की जांच सीनियर डॉक्टर के अलावा स्वयं कुलपति करें।
शामली स्थित कैराना निवासी ईशा अली की शिकायत पर बुधवार को डॉ. महावीर ग्रेवाल और डॉ. कुंदन मित्तल को जांच कमेटी में शामिल किया गया था। ईशा अली ने बताया कि वह सुबह जांच कमेटी की ओर से दिए गए समय पर पहुंच गया और उसके टीम के समक्ष जाते ही डॉ. कुंदन ने कहा कि वह इतने समय पर कैसे आ गया। वह कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर दिखाए कि वहीं शिकायतकर्ता है या नहीं। अधिकारी ने मामले की जांच करने की बजाए, उल्टा उसी की जांच शुरू कर दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि डॉ. कुंदन मित्तल एक जूनियर डॉक्टर हैं, जबकि उसने जिसकी शिकायत दी है वह ऑर्थो के सीनियर डॉक्टर हैं। कोई जूनियर अपने सीनियर की जांच कैसे कर सकता है। इस पर डॉ. कुंदन ने कहा कि वह डॉक्टर हैं, उसे कैसे पता है। इसी बातचीत के बीच उसने मांग की है कि इस मामले की जांच डॉ. ग्रेवाल संस्थान के कुलपति के साथ करें। इस पर जांच रोक दी गई और डॉ. ग्रेवाल ने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच करेंगे। वह 100 से अधिक जांच कर चुके हैं, यदि इस मामले में शिकायतकर्ता दोषी हुआ तो वह भुगतेगा और यदि डॉक्टर दोषी हुआ तो उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा। ईशा अली ने जांच अधिकारी को बताया कि उसका आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी बेटी के ऑपरेशन का सामान संस्थान में ही महंगी कीमत पर मंगाया और उसके साथ ठगी की गई। इसके सबूत के रूप में उसने संस्थान का ही रिकार्ड उनके समक्ष रख दिया। इसमें पूर्व निदेशक ने संस्थान में करोड़ों रुपये के अवैध इम्प्लांट जब्त कर रखे हैं और अधिकारी मानते हैं कि यह गलत कार्य संस्थान में होता है। यही नहीं उसने डॉक्टर की विडियो भी टीम को दी है, इसमें डॉक्टर स्वयं इम्प्लांट का मोल भाव कर रहे हैं।
---
यह मामला सेशन कोर्ट, उपभोक्ता कोर्ट व पुलिस के पास भी विचाराधीन
ईशा अली का मामला सेशन कोर्ट, उपभोक्ता कोर्ट के अलावा पुलिस के पास भी विचाराधीन है। अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद डीएसपी मोहमद जमाल भी जांच कर रहे हैं।
---
शिकायतकर्ता किसी के कहने पर चल रहा है। उसे किसने बताया कि वह जूनियर हैं या सीनियर। वह उनसे जांच नहीं कराना चाहता यह उसकी मर्जी है। अब संस्थान तय करेगा कि जांच टीम में कौन शामिल होगा। इसके लिए उसके पास सूचना भेज दी जाएगी।
- डॉ. कुंदन मित्तल, पीजीआईएमएस