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रात में लगी अदालत, सदर एसएएचओ और जांच अधिकारी से मांगा जवाब

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टिटौली माइनर में बच्ची का शव मिलने का मामला:
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बच्ची का अंतिम संस्कार रोकने और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की सुनवाई के लिए रात में लगी अदालत
- कोर्ट ने बुधवार सुबह तक सदर एसएएचओ और जांच अधिकारी से मांगा जवाब

- ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन मलिक ने कोर्ट में याचिका लगाकर की थी दिल्ली एम्स और चंडीगढ़ पीजीआई से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग
- अदालत ने 30 मिनट के सुनवाई में एसएचओ और जांच अधिकारी को समन जारी कर जवाब दाखिल करने के दिये आदेश

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
टिटौली माइनर में मिले बच्ची के शव का अंतिम संस्कार रोकने और दिल्ली एम्स व चंडीगढ़ पीजीआई के मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की याचिका पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट जेएमआईसी सीमा ने मंगलवार रात को सुनवाई की। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन मलिक ने कोर्ट में रात को याचिका दायर की थी। विशेष अदालत ने तीस मिनट की सुनवाई के बाद सुबह नौ बजे तक सदर थाना प्रभारी और मामले के जांच अधिकारी को पेश होकर जवाब दाखिल करने के आदेश जारी किये हैं।

मेडिकल बोर्ड के पोस्टमार्टम में रेप की पुष्टि नहीं
बता दें कि रविवार को टिटौली माइनर में मिले एक बैग के अंदर एक बच्ची का क्षत विक्षत शव मिला था। आरोपियों ने लड़की की हत्या कर उसका शव बैग में बंद करके टिटौली माइनर में फेंक दिया था। दोपहर को एक किसान ने लड़की का शव माइनर में देखा था। लड़की की उम्र करीब दस साल थी। शव की आंखें और जीभ बाहर निकली हुई थी। उसका दाहिना हाथ जानवरों ने नोंच रखा था। पुलिस को मृतका के पास पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले थे। मृतका ने लाल रंग की टीशर्ट, बालों में पीले रंग क्लिप और लाल रंग का नेल पॉलिश लगा रखी थी। मेडिकल बोर्ड द्वारा किये गये पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी।
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आज होना था अंतिम संस्कार
बुधवार को शव 72 घंटे पूरे होने के बाद शव का अंतिम संस्कार होना था। दुष्कर्म की आशंका के चलते मंगलवार को रात करीब सात बजे ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन मलिक ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसमें बच्ची का दिल्ली एम्स या पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने की अपील की गई। साथ ही लिखा कि यदि बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया तो दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकेगी। ऐसे में आरोपियों को सिर्फ हत्या की सजा ही मिल सकेगी। पीड़िता को इंसाफ नहीं मिलेगा। एडवोकेट ने मांग की कि बुधवार को शव का अंतिम संस्कार न किया जाए। इसके बाद कोर्ट ने करीब तीस मिनट पर तक सुनवाई करने के बाद मामले में सदर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को सुबह कोर्ट में पेश होने के आदेश दिये हैं।
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