सेंट्रल जीएसटी, स्टेट जीएसटी में नहीं जाती शिकायत, सर्विस प्रोवाइडर हैं परेशान
- रोहतक के दो सौ से अधिक सर्विस प्रोवाइडर की दिक्कत, उनकी ऑनलाइन शिकायतें दोनों ही विभागों पास नहीं जा रहीं
- स्टेट जीएसटी के पास परेशानी लेकर आ रहे सर्विस प्रोवाइडर, सेंट्रल जीएसटी विभाग को रोहतक की समस्या बताई गई
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स ने सर्विस प्रोवाइडर डीलरों के सामने बड़ी परेशानी ला दी है, उनकी शिकायत न तो सेंट्रल जीएसटी विभाग में जा रहीं है न ही स्टेट जीएसटी विभाग में। रोहतक से दो सौ से ज्यादा सर्विस प्रोवाइडर इससे परेशान है। जीएसटी के तहत रिटर्न भरने के दौरान अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उनकी सुनने वाला कोई है ही नहीं। सर्विस प्रोवाइडर सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी कार्यालय के चक्कर काट रहें हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है। समस्या यह है कि जब शिकायत ही दर्ज नहीं हो रही तो कार्रवाई कहां से हो।
असल में, यही जानकारी नहीं है कि कौन सा सर्विस प्रोवाइडर डीलर स्टेट जीएसटी के अंतर्गत जाएगा और कौन सा सेंट्रल जीएसटी के, क्योंकि शिकायत संबंधित विभाग पर ऑनलाइन पहुंच ही नहीं रही है। जीएसटीएम के अंतर्गत रोहतक में आठ हजार से अधिक व्यापारी पंजीकृत है, इनमें से दो से अधिक व्यापारी सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करते हैं। जैसे सिक्योरिटी एजेंसी, फाइनेंस कंपनी, कांट्रेक्टर, मैन पावर प्रोवाइडर आदि। ऐसे व्यापारी जो अपनी सेवाएं दूसरों को उपलब्ध कराते हैं, न कि खुद किसी उत्पाद का निर्माण करते हैं या बिक्री करते हैं। लघु सचिवालय स्थित स्टेट जीएसटी कार्यालय में चार से पांच ऐसी शिकायत आ चुकी है, जिसमें रिफंड के लिए आवेदन करने के लिए सर्विस प्रोवाइडर डीलर से गलती हो गई, जिसे ठीक कराने के लिए उसने जीएसटी विभाग में ऑनलाइन शिकायत दी, लेकिन यह शिकायत कहीं रिसीव ही नहीं हो रही है। ये शिकायतें निस्तारण के लिए न तो स्टेट जीएसटी कार्यालय पहुंचीं और न ही सेंट्रल जीएसटी। नतीजा इन सर्विस प्रोवाइडर को अपना रिफंड नहीं मिल पाएगा, जो कि उनका हक है।
शिकायतों की हो रही पड़ताल
जिला कर अधिकारी सुलक्षणा खुराना ने बताया कि इस मामले से सेंट्रल जीएसटी विभाग को भी अवगत कराया गया। सर्विस प्रोवाइडर डीलर्स की शिकायतों को निस्तारण के लिए क्यों नहीं आ रहीं है, इसकी पड़ताल की जा रही है। विभाग कोशिश कर रहा है, जिससे सर्विस प्रोवाइडर को परेशानी पेश नहीं आए।