आईसीटी से गुणवत्तापरक और आधुनिक शिक्षा दें शिक्षक- डॉ. आहूजा
- सीआर बीएड कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी को भरपूर प्रयोग करें ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक और आधुनिक तरीके से शिक्षा दी जा सके। सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों को इस नई विधा में निपुण हो जाना चाहिए। दुनिया में आज प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। इसलिए सफलता पाने के लिए आईसीटी का प्रयोग अनिवार्य हो गया है। यह बात गुरु गोबिन्द सिंह इन्द्रप्रथ विश्विद्यालय,नई दिल्ली में शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित आहूजा ने व्यक्त किए। वे छोटूराम शिक्षण महाविद्यालय में उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा वित्तपोषित ‘आईसीटी इन टीचिंग लर्निंगऱ् ब्रेकिंग डाउन द बैरियर टू एजुकेशन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन सुबह के सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित कर रहे थे। कॉलेज प्राचार्या डॉ. सुरेखा खोखर ने डॉ. अमित आहूजा का संगोष्ठी में पहुंचने पर स्वागत किया।
डॉ. अमित ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की सर्वाधिक अनोखी विशेषता यह है कि इसे समय और स्थान में समायोजित किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने असमामेलित अधिगम्यता (डिजिटल अभिगम्यता) को संभव बनाया है। अब छात्र किसी भी समय अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन अध्ययन पाठ्यक्त्रस्म सामग्री को पढ़ सकते हैं। जब से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को एक शिक्षण माध्यम के रूप में उपयोग किया गया है, इसने एक त्रुटिहीन प्रेरक साधन के रूप में कार्य किया है, इसमें वीडियो, टेलिविजन, मल्टीमीडिया कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का उपयोग शामिल है जिसमें, ध्वनि और रंग निहित है। इससे छात्र सीखने की प्रक्त्रिस्या में गहराई से जुड़ते हैं। प्रतियोगितात्मक दौर में यह प्रत्येक विद्यार्थी की प्रथम आवश्यकता होती है, अपने ज्ञान को अद्यतन करना और ऐसे में जब शिक्षा एवं विज्ञान के क्षेत्र में नित-नए परिवर्तन हो रहे हैं तो सूचना एवं संचार की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह ही वह साधन है जिसके द्वारा विद्यार्थियों को सही एवं प्रामाणिक जानकारी प्राप्त होती है।
वहीं, केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेन्द्रगढ़ के शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश चहल ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से प्रौद्योगिकी ने हर संभव मार्ग से हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। भारत एक सफल सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से सज्जित राष्ट्र होने के नाते सदैव सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अत्यधिक बल देता रहा है, न केवल अच्छे शासन के लिए बल्कि अर्थव्यवस्था के विविध क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा आदि के लिए भी भरपूर प्रयोग हो रहा है।
संगोष्ठी के समापन सत्र की मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जाट सूरमा स्मारक महाविद्यालय,रोहतक की प्राचार्या डॉ. संगीता दलाल रहीं।
डॉ. दलाल ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। आईसीटी में विद्यार्थियों और शिक्षकों के शिक्षण पर प्रभाव डालने की अपार क्षमता है और यह हमारे देश में शैक्षिक व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने और उसे अधिक प्रभावी बनाने के रास्ते उपलब्ध कराती है।
इस अवसर पर संगोष्ठी कन्वीनर मंजू गहलावत, आयोजन सचिव डॉ. इंदु बाला तहलान व डॉ. रंजू मलिक, कॉ-ऑडिनेटर डॉ. सीमा सिरोही, सह आयोजन सचिव डॉ. सुनीता आर्या सहित कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित रहे।