अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर में बेखौफ अवैध रूप से चल रहे पीजी सेंटर नगर निगम को हर साल लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं। बावजूद इसके निगम के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। मेयर की पहल पर टैक्स ब्रांच ने रेजिडेंशियल एरिया में कामर्शियल गतिविधियां चलाने वालों की एक सूची सौंपी है, जिसमें मात्र 15 पीजी सेंटर और हॉस्टल है, जो टैक्स जमा करवा रहे हैं। रिपोर्ट से असंतुष्ट मेयर ने मामले को हाउस की संभावित मीटिंग के एजेंडे में एडिशनल करके जोड़ा है, ताकि इसकी जांच पड़ताल करवाई जा सके।
निगम एक्ट के तहत हर पांच साल बाद शहर में सर्वे करवाना अनिवार्य होता है, ताकि यह पता लग सके कि शहर में कितनी प्रोपर्टी यूनिट बढ़ी। इसमें रेजिडेंशियल के साथ-साथ कामर्शियल यूनिट भी होती हैं, लेकिन रोहतक में पिछला सर्वे 2011 में हुआ था। नियमों के तहत नया सर्वे साल 2016 में करवाया जाना था, लेकिन सरकार और निगम प्रशासन खामोश है। यहीं कारण है कि एक साल बाद भी सर्वे नहीं हो सका है। पिछले दिनों निगम प्रशासन ने सर्वे शुरू किया था, जिसे चंडीगढ़ से रुकवा दिया गया। सर्वे न होने का सीधा फायदा उन लोगों को मिल रहा है, जो प्रॉपर्टी टैक्स तो रिहायशी दर पर जमा कराते हैं, लेकिन गतिविधियां व्यावसायिक चलाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक सर्वे न होने के कारण निगम को हर साल 50 लाख से 1 करोड़ के बीच में नुकसान हो रहा है।
मेयर ने मांगी रिपोर्ट, मात्र 15 पीजी सेंटर और हॉस्टल मिले
एक सप्ताह पहले मेयर रेनू डाबला ने निगम की टैक्स ब्रांच से विशेष रिपोर्ट मांगी। मेयर की ओर से पूछा गया था कि शहर में रिहायशी एरिया में कितनी कामर्शियल यूनिट हैं। निगम ने 185 संस्थानों की सूची दी। अध्ययन करने पर इसमें ज्यादातर होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हाल, ऑटो एजेंसी से लेकर दूसरे संस्थान मिले। इसमें पीजी सेंटर या हास्टल की संख्या मात्र 15 पाई गई। जबकि शहर के अंदर बजरंग भवन फाटक से लेकर राजीव गांधी चौक तक दोनों तरफ सैकड़ों पीजी गेस्ट हाउस और हास्टल चल रहे हैं। एमडीयू और पीजीआई जैसे बड़े संस्थान नजदीक होने के कारण एरिया में लोगों ने घरों को पीजी गेस्ट हाउस में बदला हुआ है। इतना ही नहीं, एमडीयू और पीजीआई में हास्टल की सीटें कम होने के कारण काफी लोगों ने निजी हास्टल तक खोल रखे हैं।
निगम को आर्थिक नुकसान तो, सुरक्षा के लिए भी खतरा
रोहतक शहर को प्रदेश की राजनीतिक राजधानी माना जाता है। सुरक्षा के लिहाज से शहर बेहद संवेदनशील है। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों के बाद तो सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा संवेदनशील हो गई है। अब डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम भी रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। इसके बावजूद पीजी सेंटर और हास्टल का पंजीकरण न होना निगम के साथ-साथ पुलिस के लिए भी चुनौती रहता है। निगम को जहां आर्थिक नुकसान होता है, वहीं पुलिस को अंदेशा रहता है कि यहां कहीं कोई बाहर से असामाजिक तत्व न रह रहा हो।
निगम प्रशासन से रिहायशी एरिया में चल रही कामर्शियल यूनिट की सूची मांगी थी। सूची में शामिल 185 यूनिट में ज्यादातर सड़क किनारे होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हाल व दूसरे संस्थान हैं। पीजी गेस्ट हाउस और हॉस्टल की संख्या मात्र 15 है। जबकि दिल्ली रोड पर मेडिकल मोड से राजीव चौक तक सैकड़ों लोग ऐसे हैं, जो रिहायशी एरिया में कामर्शियल गतिविधि चला रहे हैं। हाउस की मीटिंग में एडिशनल एजेंडे के तौर पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव शामिल किया गया है।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
शहर में 2011 में सर्वे हुआ था, जिसकी रिपोर्ट ही उनके पास है। नए सर्वे शुरू होने का इंतजार है। इसके बाद ही कामर्शियल यूनिट की संख्या बढ़ पाएगी।
-हरीश दुग्गल, जोन टैक्स आफिसर
100 को भेजा नोटिस, आए मात्र 10
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की तरफ से 15 दिन पहले एक सूची तैयार की गई थी। सूची में उन 100 लोगों को शामिल किया गया, जिनके ऊपर निगम का प्रॉपर्टी टैक्स सबसे ज्यादा बकाया है। इसमें 5 लाख से 35 लाख तक के बकायेदार शामिल किए। निगम ने ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में टैक्स जमा कराने के लिए कहा था, लेकिन मात्र 10 लोगों ने 20 लाख के करीब टैक्स जमा कराया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि अब निगम के पास सख्ती बरतने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचा है।