जीएसटी प्रभाव : सूरत और दिल्ली से नहीं आ माल, बाजार सूना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से बाजार में आई मंदी कम होने का नाम नहीं ले रही। इसका असर त्योहार पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले कई सालों से जहां तीज आने तक बाजार में रौनक बढ़ जाती थी। वहीं अबकी दुकानदार ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं। जीएसटी का सबसे अधिक प्रभाव कपड़ा उद्योग पर पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार 80 प्रतिशत तक बिक्री गिर गई है। सूरत और दिल्ली से आने वाला कपड़ा जुलाई शुरू होने के साथ ही नहीं आ रहा है। दुकानदारों के पास नया प्रोडक्ट नहीं आने से वह ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। कुछ दुकानों पर तो स्टॉक ही नहीं बचा है।
शौरी क्लाथ मार्केट के प्रधान गुलशन ईश्पुनियानी ने बताया कि थोक बाजार तो महीने भर से ठप पड़ा है। कुछ रिटेल दुकानों पर जो व्यापार हो रहा था, वह भी अब ठप होने की कगार पर है। सूरत से आने वाला कपड़ा मार्केट में नहीं आ रहा है। सूरत के व्यापारी जीएसटी पर लगाए पांच फीसदी टैक्स के विरोध में जीएसटी नंबर नहीं लेने पर अड़े हैं। इसी वजह से सूरत समेत अहमदाबाद और दिल्ली से आने वाला कपड़े का नया डिजाइन बाजार तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने बताया कि आगामी 5 अगस्त को होने वाली जीएसटी सेंटर काउंसिलिंग की मीटिंग के बाद ही कोई फैसला हो सकेगा।
बाजार में नए डिजाइन की कमी
शहर के बाजारों में ग्राहकों की कमी का मुख्य कारण यह है कि इस बार कपडे़ के साथ ही अन्य प्रोडक्ट में नए डिजाइन की भारी कमी है। फिलहाल बड़े उद्यमी जीएसटी के कारण नया माल निकालने या खरीदने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। दुकानदारों के पास बचा पुराना स्टॉक भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। यही वजह है कि त्योहार के मौके पर भी बाजार सूना पड़ा है।
पिछले वर्षों की बात की जाए तो सावन माह के दौरान बाजार की गलियों में पांव रखने तक की जगह नहीं होती थी। जीएसटी के आने से बाजार इतना मंदा हो गया है। पिछले साल त्योहार के समय एक महीने के दौरान जहां 80-90 हजार का माल बिक जाता था, वही अब 10-20 हजार तक आ पहुंचा है। ग्राहक नया माल मांग रहे हैं जबकि पीछे से माल आना बंद है।
- दीपक पूनिया, कपड़ा व्यापारी।