सिंथेटिक ट्रैक पर दे रहे तेजी को ‘धार’
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश नेे देश को सबसे अधिक खिलाड़ी दिए हैं। यहां से निकले कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। प्रदेश सरकार की ओर से भी खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं।
कुछ साल पहले तक यहां कुश्ती और बॉक्सिंग जैसे खेलों का ही क्रेज रहता था। मगर वर्तमान में इनसे अलग भी कई अन्य खेल हैं, जिनमें खिलाड़ियों का रुझान बढ़ा है। यहां प्रोफेशनल एथलीट बनने के लिए भी अब काफी खिलाड़ी सामने आ रहे हैं।
सिंथेटिक ट्रैक और बेहतरीन कोचिंग के चलते रोहतक एथलेटिक्स में भविष्य बनाने वालों का गढ़ बनता जा रहा है। यहां प्रैक्टिस करने वालों में जिले और प्रदेश के खिलाड़ियों के अलावा दूरदराज राज्यों के धावक भी शामिल हैं।
बेहतर एथलीट बनने के लिए वह सुबह शाम खूब पसीना बहा रहे हैं। इनमें कुछ खिलाड़ी ऐेसे हैं जो नौकरी लगने के बावजूद प्रैक्टिस में जुटे हैं। एमडीयू के सिंथेटिक ट्रैक पर भविष्य बनाने में जुटे खिलाड़ियों ने अमर उजाला से अपना अनुभव साझा किया।
नौकरी लगने और शादी होने पर भी नहीं छोड़ा ओलंपिक का सपना
मूल रूप से पानीपत की रहने वाली अंजू का बचपन से ही प्रोफेशनल धावक बनने का सपना रहा है। उन्होंने 2013 में हुई नेशनल इंटर जोन की 400 मीटर हर्डल रेस में रजत पदक जीता।
इसके बाद ओपन नेशनल में 2014 में कांस्य और 2015, 2016 में रजत हासिल किया। उन्होंने 2016 में खेल कोटे से भिवानी में रेलवे की टीसी की नौकरी ज्वाइन की। इसी साल फरवरी में शादी के बंधन में बंधने के बाद भी प्रैक्टिस कर रही हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे ने उन्हें ट्रेनिंग के लिए दो महीने की स्पेशल छुट्टी मंजूर की है। वह ओलंपिक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए स्पेशल रोहतक आई हुईं हैं।
देव कॉलोनी की नैंसी में हैं धावक बनने के सभी गुण
देव कॉलोनी की रहने वाली नैंसी अभी ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रही है। उन्होंने हरियाणा के उभरते खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर दो साल पहले ही दौड़ लगानी शुरू की। उनका सपना बड़ी एथलीट बनने का था। इसलिए घर के पास ही एमडीयू स्थित सिंथेटिक ट्रैक पर प्रैक्टिस करने लगी। यूथ नेशनल की 400 मीटर दौड़ में उन्होंने कांस्य पदक जीता।
इसके अलावा स्कूल स्टेट की 100 मीटर में स्वर्ण हासिल किया। अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह स्कूल जाने से पहले प्रैक्टिस करती हैं। इसके बाद स्कूल से आने पर दोबारा जुट जाती हैं।
रजनी कोे है पदकों की भूख
सेक्टर-2 में रहने वाली रजनी नागर ने 2012 में बिना किसी स्पेशल प्रशिक्षण के ही सात राज्यों की नॉर्थ जोन में स्वर्ण हासिल कर लिया था। अगले साल प्रशिक्षण लेना शुरू किया तो इंटर जोन नेशनल में कांस्य जीता। उन्होेंने 2015 और 2016 में लगातार नेशनल में गोल्ड हासिल किया। उनका लक्ष्य भारत का झंडा विदेश में फहराने का है।
इसके लिए उन्होंने हर वह चीज छोड़ दी है जो उनकी प्रैक्टिस के बीच आ सकती है। वह बेहतरीन एथलीट बनने के लिए अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखती हैं।
दूरदराज के खिलाड़ी ले रहे रोहतक में प्रशिक्षण
सहारनपुर से रोहतक प्रशिक्षण लेने आए राशिद ने बताया कि उन्होंने 2015 में दौड़ लगानी शुरू की। इसी साल उन्होंने नेशनल गेम्स में 100 मीटर और 400 मीटर में रजत हासिल कर लिया।
अपनी प्रतिभा निखारने के लिए वह रोहतक आए हैं। इसी तरह ग्वालियर से विशाल अपना भविष्य बनाने रोहतक आए हैं।
संसाधन मिलें तो और बेहतर कर सकते हैं खिलाड़ी
एथलेटिक्स कोच रमेश सिद्धू ने बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनने के लिए महज सिंथेटिक ट्रैक और कोच के होने से काम पूरा नहीं माना जाता। इसके लिए प्रोफेशनल फिजीशियन, ऑर्थो स्पेशलिस्ट, डाइटेशियन और साइकोलॉजिस्ट की भी उतनी ही आवश्यकता रहती होती है। अगर खिलाड़ी को ये संसाधन भी उपलब्ध हो सकें तो वह और बेहतर कर सकता है।
यहां मिलेगा एथलेटिक्स का प्रशिक्षण
एमडीयू में एथलेटिक्स के प्रशिक्षण के लिए कोच हैं। उनकी देखरेख में अभी तक 30 से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और 300 से अधिक नेशनल अवार्ड जीत चुके हैं। यहां प्रशिक्षण लेने के लिए वह इच्छुक एथलेटिक्स का ट्रायल लेते हैं। इसमें पास होने वाला कोई भी खिलाड़ी उनके पास निशुल्क कोचिंग ले सकता है।