फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला अस्पताल में दीवार तक सीमित चादर बदलने के नियम

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रोहतक। प्रदेश सरकार भले ही जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए नए-नए नियम बना रही हो, स्वास्थ्य विभाग इनकी धज्जियां उड़ाने में कसर नहीं छोड़ता। जिला अस्पताल रोहतक का महिला एवं प्रसूति विभाग भी इनमें से एक है। यहां दीवारों पर हर दिन मरीजों को अलग-अलग रंग की चादर देने का दावा तो किया जाता है, लेकिन इस आदेश पर अमल नहीं होता।

स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार पीले रंग की चादर शनिवार के लिए निर्धारित है। लेकिन रविवार को जिला अस्पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग के वार्ड में भी पीले रंग की चादर देखने को मिली। नियमानुसार रविवार को पीच (बादामी) कलर की होनी चाहिए थी।
विज्ञापन


हालांकि, आपातकालीन विभाग में इसका रंग बादामी ही था। अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से जच्चा-बच्चा में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि कुछ बेड पर तो चादर तक नहीं बिछाई गई है। मरीज बगैर चादर के बेड पर लेटे मिले। महिलाओं ने बताया कि चादर गंदी होने पर उन्होंने नीचे रख दी लेकिन बार-बार मांगने पर भी साफ चादर नहीं दी जाती।
विज्ञापन

इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि अस्पताल में हर दिन तय रंग के अनुसार चादर बिछाई जाती है। जच्चा और मरीजों के स्वास्थ्य को देखते हुए हम प्रयास करते हैं कि अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखा जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें