कलानौर। निराला साहित्यिक कला मंच की ओर से कलानौर में हरियाणवी बोली या भाषा और साहित्य विषय पर राष्ट्रीय साहित्य उत्सव एवं सम्मान समारोह व पुस्तक विमोचन का आयोजन किया गया। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश-प्रदेश के 31 साहित्यकारों को सम्मानित किया व 10 पुस्तकों का भी विमोचन किरा गया।
निराला मंच के अध्यक्ष डॉ. सत्यबीर निराला ने सम्मान समारोह में पहुंचे सभी साहित्यकारों का अभिनंदन व स्वागत किया। डॉ. अशोक कुमार मंगलेश ने मंच का संचालन किया।
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बाबूराम ने अध्यक्षता की। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के हिंदी हरियाणवी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी मुख्य अतिथि रहे। अतिविशिष्ट अतिथि डॉ. रामफल खटकड़, डॉ. मधुकांत, डॉ. जयभगवान सिंगला, विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके शर्मा, हलचल हरियाणवी, मोहन निरंकारी, डॉ. अशोक कुमार मंगलेश की उपस्थिति में 31 साहित्यकारों, व हिंदी सेवियों को सम्मानित किया गया।
प्रो. बाबूराम ने बताया कि हिंदी पूरे विश्व को जोड़ने वाली भाषा है। इसी तर्ज पर हरियाणवी का बोलबाला है। प्रधानमंत्री की कविताओं का मेरी ओर से हरियाणवी में अनुवाद होना इसका सशक्त प्रमाण है। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी एवं निराला मंच का यह कार्यक्रम इसका प्रमाण है। हरियाणवी का मतलब भारत की संस्कृति, सभ्यता तथा भारतीय चिंतन की परंपरा है। उन्होंने कहा कि हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने में हरियाणा साहित्य अकादमी अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने कहा कि हरियाणवी का समृद्ध लोक साहित्य और व्याकरण है, इसलिए यह बोली नहीं बल्कि भाषा का दर्जा पाने में समर्थ है। हरियाणवी का विकास तभी संभव होगा, जब हम इसे सहृदयता और स्वेच्छा के साथ अपनाएंगे। संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए हरियाणवी साहित्यकार डॉ. रामफल खटकड़ ने कहा कि वर्तमान में हरियाणवी पर खूब लेखन, गायन और यहां तक कि मीडिया व सिनेमा की भाषा भी बनी हुई है।
आज हरियाणवी का बोलबाला राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम फहरा रही हैं। डॉ. मधुकांत और डॉ. जयभगवान सिंगला ने डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी के वक्तव्य का समर्थन करते हुए हरियाणवी को राष्ट्रीय भाषा बनाए जाने पर बल दिया। डॉ. अशोक मंगलेश ने हिंदी, हरियाणवी और क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवाद पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अनुवाद दो भाषाओं का ही नहीं, अपितु दो संस्कृतियों का होता है। नई शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवाद को बल मिला है। हरियाणवी, जिसका सशक्त माध्यम अनुवाद है। वर्तमान में हरियाणवी और अन्य क्षेत्रीय बोलियों पर प्रचुर मात्रा में सृजन और अनुवाद कार्य हो रहा है। उन्होंने हरियाणा की प्रांतीय भाषा हरियाणवी को भी बढ़ावा देने की बात कही।
इन पुस्तकों का विमोचन किया गया
डॉ. सत्यबीर निराला की पुस्तकें घटता आंचल व टूटता तारा, सुशीला जांगड़ा की पुस्तक लोक रश्मियां, राधेश्याम गोमल की पुस्त मित्र उपनिषद, मोनिका यादव की पुस्तक अव्यक्त प्रेम, डॉ. त्रिलोकचंद की पुस्तकें ये हीरे हिंदुस्तान के व रतनपुर की महामाया, देवीराम शर्मा की पुस्तक हरियाणा की माटी की सुगंध, डॉ. फूल कुमार राठी की पुस्तक मुक्तक काव्य का विमोचन किया गया।
मंच से डॉ. बाबूराम, डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी, डॉ. मधुकांत, डॉ. रामफल खटकड़, डॉ. जयभगवान सिंगला, हलचल हरियाणवी, मोहन निरंकारी, एसके शर्मा और डॉ. अशोक कुमार मंगलेश को निराला हिंदी साहित्य शिरोमणि सम्मान दिया गया। राधेश्याम गोमला, नरेंद्र अत्री, देवीराम शर्मा, शकुंतला काजल, सुशीला जांगड़ा, अशोक जाखड़, सीमा रंगा, प्रो शामलाल डॉ. सविता शर्मा, अर्चना कोचर, रामेश्वर देव, प्रेमपाल शर्मा, कमलेश पालीवाल, मुल्क राज, श्रीनिवास, ओमप्रकाश चौहान, प्रेमपाल सागर, जयसिंह, फूल कुमार, डॉ. त्रिलोकचंद, सुरेश कुमार आदि को निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान दिया गया। इसके अतिरिक्त मनोज गौतम को निराला उद्घोषक सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया। मंच संचालन डॉ. मंगलेश और संयोजन समिति से जगजीत निराला, आदित्य, सुदीक्षा, सिमरन व डॉ. मंजीत निराला ने किया।