करीब दो साल से रोहतक में खुलेआम पुलिस की नाक की तले ठगी की घटना को अंजाम दिया जा रहा था, लेकिन पुलिस ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। कई लोगों ने पुलिस को शिकायत भी दी, लेकिन साइबर और थाना पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया। जब लोगों की शिकायत चंडीगढ़ और पंचकूला मुख्यालय पहुंची तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
कार्रवाई करने वाली टीम ने दावा किया कि पीसीएल कंपनी ने करीब तीन हजार लोगों को जोड़ रखा था। इनमें कई लोगों को आज कुछ रकम लौटानी थी। बड़ी बात यह है कि इसमें ज्यादातर युवा जुड़े हुए थे और वह घर से ही वर्क फ्राॅम होम करते हुए रुपये कमाने की बात करते थे। एक-एक युवक ने 25 से 50 तक तो कुछ ने 100-100 आईडी बनवा रखी थीं। इससे उनके खाते में तो रुपये नहीं दिखाई देते थे, लेकिन कंपनी के एप पर यह राशि कई गुना दिखाई देती थी। कई लोगों की इस राशि को किसी न किसी बहाने से कम कर दिया तो कुछ की रकम को लैप्स कर दिया जाता था। कंपनी को जॉनी नामक युवक कई दोस्तों के साथ मिलकर चला रहा था।
30 लाख रुपये हो रखे थे एकत्र, आज मिलने थे 21 लाख
कंपनी में सैकड़ों आईडी लेकर करीब 30 लाख रुपये का निवेश करने वाले एक युवक प्रदीप ने बताया कि कंपनी अधिकारियों ने 21 लाख रुपये देने के लिए उसे दोपहर 1 बजे बुलाया था, लेकिन जब वह यहां पहुंचा ताे साइबर थाना पुलिस की टीम देखकर वह चिंतित हो गया। चूंकि 30 लाख रुपये की रकम लगा रखी थी और उसमें 21 लाख मिलने थे, जो अब नहीं मिलेंगे।
2.5 लाख रुपये लेने आई थी महिला
रोहतक निवासी सीमा ने बताया कि उसने अपनी और परिवार के लोगों की काफी आईडी बनवा रखी थीं। आज उनको 2.5 लाख रुपये मिलने थे। शाम करीब 8 बजे जब वह मौके पर पहुंची तो देखा कि साइबर टीम ने पूरा ऑफिस कब्जे में ले रखा था तो वह अपने परिचित के साथ मौके से चली गई।
-
विदेशी कंपनी खरीदती है कैप्चा, यह कहकर ली जाती थी रकम
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब लोग पूछते थे कि कंपनी की आय का स्रोत क्या है तो वह कहते थे कि विदेशी कंपनी उनसे कैप्चा खरीदती है। उसी के एवज में रुपये मिलते हैं।
कैप्चा क्या है और कैसे काम करता है?
कैप्चा एक ऐसा कोड है, जिसका वेबसाइट पर स्वचालित स्पैमिंग, धोखाधड़ी और दुर्भावनापूर्ण हमलों को रोकने के लिए किया जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई ऑनलाइन उपयोगकर्ता कंप्यूटर प्रोग्राम जैसे कि बॉट और कैप्चा को मानव उपयोगकर्ताओं और स्वचालित बॉट के बीच अंतर करने के लिए कंप्यूटिंग में उपयोग किए जाने वाले एक प्रकार के चुनौती प्रतिक्रिया परीक्षण के रूप में विकसित किया गया था।
लोग जी रहे आलीशान जीवन
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जो लोग कंपनी संचालित कर रहे थे, उनकी कुछ दिन में ही रहन-सहन में बदलाव आ गया था। लग्जरी कार और महंगे कपड़े एवं मोबाइल फोन के अलावा आलीशान ऑफिस बना रखा था। ऑफिस में 10 से 15 लोग काम करते थे। एक दुकानदार ने बताया कि कुछ दिन पहले तक यह ऑफिस गली के दूसरे छोर पर था, लेकिन करीब 10 माह पहले गली के बीच में दो मंजिला मकान में शिफ्ट किया गया था। देखते ही देखते इन लोगों की आलीशान जीवनशैली बनती जा रही थी। पहले छोटी कारें थीं, अब बड़ी कारें ले ली गई थीं। छापा डालने आई टीम ने बताया कि पुराने सदस्यों को रुपये देने के लिए नए सदस्यों से आने वाली रकम से कुछ हिस्सा दे दिया जाता था। जिससे यह दिखता था कि कंपनी को आय हो रही है। इसी राशि से कंपनी कर्मियों को तनख्वाह दी जा रही थी।
पंचकूला की टीम ने रोहतक से पुलिस सहयोग मांगा था। साइबर थाने से उनके साथ एक टीम लगा दी थी। इसके अलावा पूरी कार्रवाई वहीं की टीम ने की है।
- वाईवीआर शशी शेखर, एएसपी रोहतक।