कलानौर में पुलिस ने 29 बंगलादेशियों को ईंट भट्ठे पर काम करते पकड़ा है। पिछले एक वर्ष से मजदूरी कर रहे इन लोगों की जानकारी भट्टा मालिक ने प्रशासन से छुपा कर रखी।
बांग्लादेश निवासी नूर इस्लाम ने बताया कि करीब 22 वर्ष पहले वह बाला घाट पश्चिम बंगाल बाॅर्डर से रात के अंधेरे में भारत की सीमा में घुसा था। इसके लिए उसने एजेंट को 15 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद वह गाजियाबाद, सोनीपत, नोएडा भट्ठों पर मजदूरी करने पहुंचा। पत्नी हुन्नरा बेगम को भी वह साथ ले आया। यहां इनके तीन बच्चे हुए। एक लड़की बंगलादेश में ही रहती है।
बांग्लादेश के निवासी मुशर्रफ ने बताया कि वह पिछले साल ही 25 हजार रुपये देकर यहां आया है। एजेंट ने सीमा पार कराई। ऐसे करीब 100 से अधिक बांग्लादेशियों के जाली आधार कार्ड तैयार किए गए। हपीजूल ने बताया कि वह बाला घाट सीमा से रात के अंधेरे में भारत की सीमा में दाखिल हुआ था।
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ईंट-भट्ठे से 29 बंगलादेशी भट्ठे से पकड़े गए हैं। कागजी कार्रवाई कर इन्हें रोहतक सिविल लाइन थाना भेजा जाएगा। यहां इनके और साथी हैं। इन सभी को एक साथ सीमा पार बांग्लादेश भेजा जाएगा।
त्रिलोचन, जांच अधिकारी
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पुलिस लाइन में रखे गए बांग्लादेशी
रोहतक। टिटौली गांव से पकड़े सात बांग्लादेशी को पुलिस लाइन में सुरक्षा के बीच रखा हुए है। यहां से पूछताछ के बाद पुलिस केंद्रीय गृहमंत्रालय के माध्यम से बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ के हवाले करके आएगी। वहां से इनको बांग्लादेश भेजा जाएगा। सदर थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने बताया कि रविवार को टिटौली गांव में रह रहे सात बांग्लादेशी पकड़े गए थे। संवाद