पीजीआई प्रबंधन की ओर से डिमोट किए गए कर्मचारियों का मामला अब सुलझते नजर आ रहा है।
सोमवार को वीसी डॉ. ओ. पी. कालरा और कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई वार्ता के बाद यह कहा जा रहा है कि पीजीआई प्रबंधन को अपनी गलती का अहसास हो गया है।
हालांकि यह आदेश चीफ सेक्रेटरी के निर्देश पर जारी किए गए थे, इसलिए आदेश वापस भी उन्हीं के निर्देश पर होंगे। मंगलवार को कुलपति और निदेशक चंडीगढ़ जाएंगे और इस मामले को चीफ सेक्रेटरी के सामने रखेंगे।
हाईकोर्ट के स्टे के बाद भी पीजीआई प्रबंधन ने 37 कर्मचारियों का डिमोशन कर दिया था। यह कर्मचारी आरक्षण के आधार पर पदोन्नत किए गए थे।
कर्मचारियों ने रविवार को कुलपति डॉ. ओपी कालरा को कोर्ट के स्टे के बारे में जानकारी दी। साथ ही ज्ञापन सौंप कर डिमोशन का निर्णय वापस लेने की मांग की थी।
कुलपति ने सभी को सोमवार सुबह 11 बजे मिलने के लिए बुलाया था। सोमवार को कर्मचारी वीसी कार्यालय पहुंचे और यहां सभी दस्तावेज दिखा दिए। सूत्रों की माने तो कुलपति ने स्टे देखने के बाद गलती को माना है। साथ ही यह आश्वासन भी दिया है कि 24 घंटे में यह आदेश वापस ले लिए जाएंगे। इसके लिए चीफ सेक्रेटरी को भी संज्ञान में लाना होगा और उनकी मंजूरी लेने होगी। मंगलवार को कुलपति चंडीगढ़ जाकर इस मामले से चीफ सेक्रटरी को अवगत कराएंगे। प्रतिनिधि मंडल में फेडरेशन के डिप्टी चेयरमैन डॉ. दिनेश निबडिया, अंबेडकर मिशनरी के अध्यक्ष विक्रम डुमोलिया, पीजीआई कल्याण संघ के वरिष्ठ उपप्रधान सुरेंद्र कुमार, राकेश कुमार, हंसराज, सुनील कुमार, चांद, संजय पोडिया, संतराम सिंधू, सूरजमल, रणबीर, सतबीर, नवीन, संजय, शर्मिला, मनोज और जितेंद्र मौजूद रहे।