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स्क्रीन पर नशे से परिवार टूटता देख नम हुई नशा पीड़ितों की आंखें

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स्क्रीन पर नशे से परिवार टूटता देख नम हुई नशा पीड़ितों की आंखें
- दोस्त के साथ शराब पीने से शुरू हुआ परिवार का टूटना, नशे की लत छोड़ कर अपने साथ परिवार को भी संभाला
- पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र में नशा मुक्ति बौद्ध दिवस पर पीड़ितों को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए दिखाई गई फिल्म
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। दोस्तों के साथ शराब पीने से शुरू हुआ नशे का दौर धीरे-धीरे बढ़ता गया। पहले ऑफिस में काम कम हुआ फिर वेतन मिलना। शराब बढ़ती गई। परिवार बिखरने तक यह सिलसिला जारी रहा। आंखें खुलीं तो नशा छोड़ने के लिए दवा ली। खुद को ही नहीं परिवार को भी संभाला। जीवन पटरी पर लौटा तो घर में खुशहाली आई। एक मशहूर टीवी सीरियल से ली गई असल जीवन की यह कहानी देख पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन पीड़ितों की आंखें नम हो गईं। मंगलवार को नशा मुक्ति बौद्ध दिवस पर वार्ड में भर्ती आठ मरीजों को नशा छोड़ कर सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उन्हें करीब एक घंटे की फिल्म दिखाई गई। इसके अलावा सात व दस मिनट की वीडियो क्लिप के जरिये उन्हें नशे के दुष्प्रभाव भी दिखाए गए।
नशे ने छीन लिया इकलौता बेटा
नशा पीड़ितों को नशे के दुष्प्रभाव बताने व जीवन के प्रति जीने के भाव पैदा करने के उद्देश्य से कुछ कहानियां उनके सामने रखी गई। जीवन में घट चुकी इन असल कहानियों को दिखाकर उनमें सकारात्मक भाव पैदा करना था। इसी कड़ी में एक पिता की दर्द भरी कहानी दिखाई गई। इसने नशा पीड़ितों को भावुक कर दिया। कहानी में पिता का इकलौता बेटा नशे की गर्त में गिर जाता है। वह हर दिन इस गर्त में धंसता जाता है और अंत में जान गंवा देता है। अपने इकलौते बेटे को खोकर पिता ने दूसरों को सही राह दिखाने की ठानी और भटके हुए युवाओं को नशे से निकालने की मुहिम शुरू की।
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निदेशक किया कार्यक्रम का शुभारंभ
नशा मुक्ति बौद्ध दिवस पर मंगलवार को मानसिक रोग विभाग में नशा विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई। राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता ने इसका शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में नशे के दुष्प्रभाव के साथ शराब से शरीर के हिस्सों पर होने वाले असर को दर्शाया गया। अफीम व तंबाकू सेवन से गिरती युवाओं की सेहत को चित्रों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया। मानसिक रोग विभाग में आने वाले मरीजों को पंफ्लेट बांटे गए। इसके अलावा मरीजों को नशा मुक्ति बौद्ध दिवस की जानकारी देने के साथ नशा न करने की शपथ लेने की अपील करते हुए फल वितरित किए गए। यहां विभाग के अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।
जागरूकता से बच सकता है समाज : डॉ. गुप्ता
पोस्टर प्रर्दशनी का अवलोकन करते हुए डॉ. राजीव गुप्ता ने कहा कि इस तरह की जागरुकता प्रर्दशनियों के माध्यम से समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को सचेत किया जा सकता है। इससे युवा व समाज बच सकता है। नशे की लत वाले व्यक्ति को प्यार व समझ से धैर्य बंधाएं, उसका मनोबल ऊंचा करें। उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। इससे वह फिर से जीने के लिए प्रोत्साहित होगा। प्रो. डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि नशे के कारण शारीरिक प्रभावों में जिगर का बढ़ जाना, पेट में सूजन, याददाश्त कम होना, रक्त शुगर का बिगड़ना शामिल है। मानसिक प्रभावों में आत्म सम्मान कम होना, हीन भावना आना, गुस्सा व चिड़चिड़ापन रहना शामिल है।
नशे की है यह पहचान
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नशा करने वाले व्यक्ति का काम में मन नहीं लगता है। इसके अलावा भूख न लगना, बात-बात पर गुस्सा आना, नींद न आना, आंखें लाल रहना, हाथ कांपना, वजन घटना, चोरी की आदत, कार्यक्षमता घटना, कपड़ों पर खून के निशान, हाथ की उंगलियों का जला होना व घर में मादक पदार्थों का पाया जाना मुख्य पहचान हैं। राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र में कोई भी पीड़ित इलाज व परामर्श ले सकता है।
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युवाओं का मार्गदर्शन जरूरी
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनीला राठी ने कहा कि युवा शक्ति को एक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। समय रहते उनकी ऊर्जा को सही राह पर डालना जरूरी है। नशा किसी भी प्रकार का हो वह शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व सामाजिक नुकसान करता है। गांवों में पीया जाने वाला हुक्का भी नुकसानदायक है। इस मौके पर डॉ. अनिल यादव, डॉ. आशीष मलिक, डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. सुधा, नर्सिंग इंचार्ज श्याम कंवर, डॉ. अनिरुद्ध, काउंसलर नीरू , दिव्यांशी, मीनू एवं विभाग के चिकित्सक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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