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फ्लैग : जिला बार के पूर्व प्रधान लोकेद्र फौगाट उर्फ जोजो के गन हाउस में डकैती का मामला

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फ्लैग : जिला बार के पूर्व प्रधान लोकेेंद्र फौगाट उर्फ जोजो के गन हाउस में डकैती और आगजनी का मामला
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हेडिंग : दंगे में लूटे गए हथियार बरामदगी के बाद भी दोष साबित नहीं कर सकी पुलिस, छह अभियुक्त बरी
: पावर हाउस चौक के पास फरवरी 2016 में दंगों के दौरान हुई थी लूटपाट व आगजनी

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों में जिला बार के पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो के गन हाउस में डकैती और आगजनी के मामले में अदालत ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। हथियार बरामद करने के बावजूद कंसाला निवासी सुनील उर्फ सोनू और अनिल, कुलताना निवासी संदीप, दिमाणा निवासी अजय और कपिल और बलंब निवासी जयभगवान उर्फ डब्बू का पुलिस दोष साबित नहीं कर सकी।
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बार प्रधान जोजो और मामा के लड़के विकास बड़क ने 22 फरवरी 2016 को सिविल लाइन थाने केस दर्ज कराया कि उसका पावर हाउस चौक के सामने भारत गन हाउस है। जाट आंदोलन के दौरान 19 फरवरी को शाम करीब साढ़े 8 बजे भीड़ ने गन हाउस में न केवल आग लगा दी, बल्कि हथियारों को लूटकर ले गए। मामला दर्ज होने के बाद सीआईए पुलिस ने जांच पड़ताल की। जांच के दौरान कंसाला निवासी सुनील उर्फ सोनू को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ पर कंसाला के ही युवक अनिल को हिरासत में लिया। इसके बाद कुलताना निवासी संदीप और बाद में दिमाणा गांव निवासी अजय व कपिल गिरफ्तार किए। रिकार्ड के मुताबिक 30 अगस्त 2016 को पुलिस ने अजय के घर से दोनाली बंदूक और छह जिंदा कारतूस बरामद किए। जबकि कपिल ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने गन हाउस से लूटे कारतूस चुलियाना गांव के पास नहर में फेंक दिए। 23 अक्तूबर 2016 को पुलिस ने छोटूराम नगर में किराए पर रह रहे जयभगवान उर्फ डब्बू को गिरफ्तार किया। तभी से जिला अदालत में आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी। वीरवार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी छह आरोपियों को क्लीन चिट दे दी। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठता है कि आखिर हथियार बरामद करने के बावजूद उनके खिलाफ सबूत क्यों नहीं पेश कर सकी। साथ ही गन हाउस को फिर किसने लूटा था?
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