मांगों के लिए सड़क पर उतरे किसान संगठन
चरखी दादरी।
पांच दिनों से मांगों के लिए एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। सड़क उतरे किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ पहले तो नारेबाजी कर रोष जताया और इसके बाद लोहारू चौक पर जमा लगा दिया। किसानों के प्रदर्शन के कारण प्रशासन को रूट भी डायवर्ट करने पड़े। वहीं जाम स्थल से गुजरने वाले वाहन चालकों से किसान उलझते नजर आए। करीब एक घंटे बाद किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने लोहारू चौक से जाम खोला।
भारतीय किसान यूनियन व किसान संघर्ष समिति संगठनों के पदाधिकारियों ने भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष धर्मपाल बाढड़ा की अगुवाई में शुक्रवार को प्रदर्शन किया। ये संगठन शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे लघु सचिवालय से वाहनों में सवार होकर लोहारू चौक पहुंच गए। प्रदर्शनकारी खेमे के पहुंचने से पहले ही जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पुख्ता प्रबंध कर दिए थे। प्रशासन ने प्रदर्शन को जहन में रखते हुए रूट डायवर्ट कराने का प्लान पहले ही तैयार कर लिया था। इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमें शहर के विभिन्न चौराहों पर तैनात रही। प्रशासन ने महेंद्रगढ़ सकी तरफ से भिवानी जाने वाले वाहनों को सिविल अस्पताल के बैक साइड से निकलवाकर वाया परशुराम चौक होते हुए घिकाड़ा रोड व बाईपास के जरिए भिवानी की तरफ रवाना किया। इसके अलावा प्रशासन ने रावलधी टी-प्वाइंट, मेजबान चौक, सिविल अस्पताल के सामने, कनीना मोड, परशुराम चौक व घिकाड़ा मोड़ पर भी पुलिस कर्मचारी तैनात कर वाहनों के रूट डायवर्ट करवाए।
किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए एसपी सुनील दलाल ने सुबह करीब नौ बजे ही रिजर्व कंपनी को लोहारू चौक पर तैनात कर दिया। इसके अलावा तहसीलदार राजकुमार अरोड़ा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट लगाया गया था। डीएसपी हेडक्वार्टर सुरेश हुड्डा व एसडीएम ओमप्रकाश सिंह भी जामस्थल पर प्रदर्शनकारियों से ठीक पहले पहुंच गए थे। किसान नेता राजकुमार हड़ौदी ने कहा कि भाजपा सरकार किसान व मजदूर वर्ग का सरकार कर्जा माफ नहीं कर रही जबकि उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। जब किसान इसके खिलाफ आवाज मुखर करते हैं तो उन पर सरकार गोलियां चलवाती है। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। करीब एक बजे प्रदर्शनकारी खेमे ने जाम खोला और इसके बाद ही ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु हो पाई।
वाहन चालकों से उलझे प्रदर्शनकारी
लोहारू चौक पर लगे करीब एक घंटे के जाम के दौरान प्रदर्शनकारी खेमे ने किसी वाहन चालक को यहां से नहीं गुजरने दिया। इस दौरान वाहन चालक अपनी परेशानियों का हवाला देते भी नजर आए। लेकिन प्रदर्शकारी खेमे ने किसी एक न सुनी। इस दौरान प्रदर्शनकारी बुजुर्गों की कई बाइक सवारों के साथ जुबानी झड़प भी हुई।
वर्जन:
प्रदर्शनकारी खेमे को शांतिपूर्वक धरना देने की ही इजाजत दी गई थी। उन्हें रोड जाम या शांति भंग करने की अनुमति नहीं थी। अशांति फैलाने वालों के साथ प्रशासन सख्ती से पेश आएगा। इस संबंध में मैंने ड्यूटी मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट तलब की है।
विजय कुमार सिदप्पा, डीसी
वर्जन:
मंदसौर में पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने, आरोपी पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई करने, स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करने व 60 साल की उम्र के बाद किसानों की पैंशन शुरू करने की मांग हमने विरोध प्रदर्शन के दौरान की है। किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
राजकुमार हड़ौदी, किसान संघर्ष समिति