रोहतक। सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने जिला अस्पताल में आए मरीजों व उनके तीमारदारों को बताया कि यदि समय पर पहचान हो जाए तो बहरापन का उपचार संभव है। विभाग समय-समय पर लोगों को सुनने की शक्ति की जांच करवाने के लिए जागरूक करता रहता है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों की माने तो देश में लगभग 6.3 प्रतिशत लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। इसमें लगभग 50 लाख बच्चे शामिल हैं। यही हाल रहा तो 2050 तक दुनिया के विभिन्न देशों में 900 मिलियन से अधिक लोग हियरिंग लॉस की समस्या से जूझ रहे होंगे। इसके तहत हर 10 में से एक व्यक्ति इसका शिकार होगा।
डॉ. अनिल बिरला ने बहरे पन को जल्दी पहचानने, समय पर इससे बचने के उपाय, कान की समस्या का इलाज समय पर करवाने व कान की सही देखभाल करने के प्रति लोगों को जागरूक किया। ईएनटी विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल डॉ. रमेश ने बताया कि बहरापन या कम सुनने की दिक्कत जन्मजात या संक्रमण के चलते हो सकती है। इसके अलावा उम्र के साथ भी यह समस्या बढ़ने लगती है। सिर और कान पर चोट लगने के अलावा अधिक शोर व ऊंची आवाज में संगीत सुनने से भी समस्या शुरू हो जाती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- समय-समय पर अपनी श्रवण क्षमता की जांच जरूर कराएं
- बच्चा जन्म के 4-5 महीने बाद भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा हो, जांच कराएं
- सर्दी-जुकाम के बाद कान में दर्द हो रहा हो तो ईएनटी सर्जन को दिखाएं
- कान की पस सुखने के बाद कान के पर्दे का भी सही होने का कराए उपचार
- कान की वेक्स जबड़े से खाना चबाने के दौरान अपने आप बाहर आ जाती है। हर रोज नहाते वक्त कान को अंगुली से साफ कर लेना ही काफी है। वेक्स नरम करने के लिए हफ्ते में एकाध बार एंटी फंगल ड्रॉप डॉक्टर की सलाह पर डाल सकते हैं।
- सर्दी-जुकाम होने पर या तुरंत बाद हवाई जहाज से यात्रा न करें। ऐसे में कान में दर्द होने की संभावना रहती है और कान का पर्दा प्रभावित हो सकता है।
मरीजों की जांच के लिए एप की ले रहे मदद
उप सिविल सर्जन डॉ. संजीव मलिक ने बताया कि सुनने की जांच की सुविधा के लिए, डब्ल्यूएचओ ने स्क्रीनिंग के लिए एक मोबाइल और वेब-आधारित सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन हीयर डब्ल्यूएचओ विकसित किया है। यह एप सामान्य श्रोताओं को उनकी सुनवाई की स्थिति की जांच करने और समय के साथ निगरानी करने के लिए एक श्रवण श्रोता तक पहुंच प्रदान करता है। एप का उपयोग करने में आसान उपयोगकर्ताओं के परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है और समय के साथ उनकी सुनवाई की स्थिति का एक व्यक्तिगत ट्रैक रिकॉर्ड रखता है।