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संशोधित : युद्ध की भूमि से मानवता का संदेश देने का कुरुक्षेत्र में अनूठा उदाहरण
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- भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं लड़ी थी अनैतिकता के खिलाफ लड़ाई
- युगों बाद आज इसी भूमि से लड़ी जा रही अस्वच्छता के खिलाफ लड़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। प्रधानमंत्री बनने के बाद हरियाणा में कुरु की भूमि से ही नरेंद्र मोदी ने बतौर पीएम अपने राजनीतिक सफर का आगाज किया था। वर्ष 2019 में पांच साल बाद कुरु की भूमि में ही अपने अंजाम पर पहुंचने के बाद इसी भूमि से आने वाले चुनाव के लिए देश की जनता से आशीर्वाद मांगा और नए चुनावी मिशन का आगाज कर गए।
वर्ष 2014 में 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 48 कोस की कुरु की भूमि में शामिल कैथल की रैली को संबोधित कर विधानसभा चुनाव से पहले अंबाला से राजस्थान बॉर्डर तक के नेशनल हाइवे का शिलान्यास किया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचे थे। हालांकि उनकी हूटिंग हुई थी और उन्हें अपना भाषण बीच में छोड़ना पड़ा था। इसके बाद हुड्डा ने ऐलान किया था कि वे प्रधानमंत्री के मंच पर नहीं जाएंगे। पांच साल बाद इसी कुरू की भूमि में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया और जनता से एक मजबूत सरकार की अपील कर गए।
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प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में कुरुक्षेत्र की भूमि को नमन करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र, जिसे ज्ञान, धर्म और कर्म की भूमि, किहा जाता है। यही वह भूमि है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन का मार्ग व न्याय का रास्ता दिखाया था। यह संभवत: पूरे प्रदेश में अनूठा उदाहरण है, जहां युद्ध भूमि से मानवता का संदेश दिया गया हो। कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अनैतिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, आज युगों बाद रोजमर्रा की जिंदगी में सफाई की लड़ाई लड़ी जा रही है। कुरुक्षेत्र में देश भर से स्वच्छता गृहियों का जुटना इस अभियान को ओर मजबूत करना है। इस लड़ाई के लिए जनता ने विश्वास जताया था। उसी विश्वास के साथ हर व्यवस्था से मलाई चाटने व गरीबों का हक मारने वाले बिचौलियों को खत्म कर दिया गया है।
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