फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआईएमएस इंप्लांट न्यूज का फॉलोअप

विज्ञापन
विज्ञापन
पीजीआईएमएस रोहतक प्रशासन और इंप्लांट सप्लायर आमने-सामने
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक प्रशासन और ऑर्थो के निजी इंप्लांट सप्लायर सालों बाद आमने-सामने हो गए हैं। संस्थान निदेशक डॉ. नित्यानंद के सख्ती बढ़ाते ही इन सप्लायरों और ऑर्थो विभाग की सांसें फूल गई हैं। एक तरफ डॉक्टर कमीशनखोरी पर लगाम लगते ही ऑपरेशन करने से हट रहे हैं दूसरी ओर इंप्लांट सप्लायर सहकारिता मंत्री से मिलकर जब्त सामान वापस दिलाने व समस्या का स्थाई समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।

नियमों की अवहेलना किसी कीमत पर मंजूर नहीं : निदेशक
फोटो सहित एसएनजे एक
संस्थान निदेशक डॉ. नित्यानंद शर्मा ने इंप्लांट विवाद पर दो टूक कहा कि उन्हें अस्पताल परिसर में नियमों की अवहेलना किसी कीमत पर मंजूर नहीं है। जब्त इंप्लांट जांच पूरी होने के बाद लौटा दिया जाएगा। अब जांच होनी है कि किस डॉक्टर ने इंप्लांट व अन्य सामान मंगाए और कितना मरीज पर प्रयोग हुआ तथा उसकी क्या कीमत वसूल की गई। उन्होंने बताया कि इस जांच के लिए तीन सीनियर डॉक्टरों की टीम गठित कर दी गई है। टीम ऑर्थो विभाग के मरीजों का रिकार्ड जांचेगी और प्रफोर्मा देखेगी कि ऑपरेशन करने वाले ने उसमें क्या एंट्री की है। अस्थि रोग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एनके मग्गू ने नियम बनाया था कि मरीज की फाइल पर पूरी डिटेल प्रफोर्मा में होनी चाहिए, इसमें लिखा होना चाहिए कि मरीज को किस कंपनी का इंप्लांट लगा है। इसके लिए बाकायदा निजी कंपनी के इंप्लांट की जानकारी देने वाले स्टीकर लगे होते हैं। संस्थान के संज्ञान में आया है कि ऑर्थो विभाग किसी नियम को नहीं मान रहा है। इसमें सबसे अहम जांच होनी है कि डॉक्टर किस कंपनी का इंप्लांट मंगवा रहे हैं, उसकी अप्रूवल कहां है।
विज्ञापन


अमृत स्टोर खुलने पर होगा समस्या का स्थाई समाधान
संस्थान में अफोरडेबल मेडिसिंस एंड रिलाइएबल इंप्लांट्स फॉर ट्रीटमेंट योजना के तहत भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्टोर खोलने की तैयारी है। इसमें इंप्लांट के रेट सरकार ने तय किए हैं, जो नो प्रॉफिट नो लॉस पर हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जा रही है, जल्द ही लाइसेंस जारी हो जाएगा। इसके बाद मरीजों को संस्थान में ही उचित कीमत पर इंप्लांट उपलब्ध होंगे।

शनिवार को भी धरा व्यक्ति, एक अधिकारी ने छुड़वाया
सूत्रों की मानें तो शनिवार को भी सुरक्षा गार्डों ने एक व्यक्ति को तकरीबन 20 लाख रुपये के इंप्लांट ले जाते हुए धर लिया। इस पर उक्त व्यक्ति ने संस्थान के एक अधिकारी से बात कराई तो अधिकारी ने कहा कि उनकी निदेशक से बात हो गई है, इसलिए छोड़ दिया जाए। गार्ड ने उक्त व्यक्ति को इंप्लांट सहित जाने दिया, लेकिन निदेशक के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी को छोड़ने की अनुमति नहीं दी थी। बताया जा रहा है कि उक्त अधिकारी ने एक ऑर्थो विभाग के डॉक्टर के आग्रह पर इंप्लांट सप्लायर को छुड़वा दिया।

-----------
48 लाख रुपये का ऑर्थो स्कोप फांक रहा धूल
सूत्रों की मानें तो डेढ़ साल पहले ऑर्थो विभाग मेें लगभग 48 लाख रुपये का ऑर्थो स्कोप आया। इसका प्रयोग करने की बजाए डॉक्टर मरीजों से बाहर से इस यंत्र को मंगाते हैं। अब अधिकारी इसकी डिटेल मांगने की तैयारी कर रहे हैं कि इसका अब तक कितनी बार प्रयोग हुआ है। यही नहीं अधिकारियों की मानें तो ऑर्थो विभाग अपनी डिमांड में कुछ नहीं देता और मरीजों से बाहर का सामान किराये के नाम पर मंगा कर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाता है।

कोई सामान बाहर जाएगा तो जांच जरूर होगी
इंप्लांट कहां से आता है, इस बात पर समस्या नहीं है। यदि मरीज स्वयं बाहर से इंप्लांट लाता है तो कोई आपत्ति नहीं है। हां अंदर से यदि कोई सामान बाहर जाएगा तो जांच होगी। सुरक्षा गार्डों का फर्ज है कि वह हर बाहर जाने वाले सामान की जांच करें कि क्या उसमें संस्थान की कोई प्रॉपर्टी तो नहीं है। यदि लोकल स्तर पर सामान नहीं मिलता तो दिल्ली से रेट कांट्रेक्ट करके मंगवा लिया जाएगा। यदि लोकल स्तर पर कोई मना करता है तो उसका लाइसेंस रद करने का प्रावधान है। अमृत स्टोर शुरू होने तक इंप्लांट के लिए रेट कांट्रेक्ट कर दिया जाएगा। ऑर्थो की समस्या यह है कि मरीज को ऑपरेशन का खर्च बताया 20 हजार रुपये जाता है, जबकि बिल निजी केमिस्टों की ओर से सवा लाख तक लिया जाता है। इसकी कई शिकायत, एफिडेविट हमारे पास हैं, इनकी जांच चल रही है।
विज्ञापन

-डॉ. नित्यानंद शर्मा, निदेशक, पीजीआईएमएस रोहतक

----
अमृत स्टोर खोलने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए सभी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।
-योगेंद्र शर्मा, मैनेजर, अमृत स्टोर रोहतक

--------------
लाखों का सामान मरीजों को कैसे दें : सप्लायर
फोटो जरूरी :::: एसएनजे दो
रोहतक। पीजीआईएमएस प्रशासन की ओर से संस्थान में जब्त किए जा रहे इंप्लांट मामले से खफा विभिन्न निजी फर्म के नुमाइंदों ने रोष जताते हुए कहा कि वह मरीज को लाखों रुपये का सामान कैसे दें। एक मरीज से डॉक्टर दस गुणा अधिक सामान मंगाते हैं। इसके साथ इन्हें लगाने के लिए औजार भी देना पड़ता है। मरीज को जरूरत 50 हजार के सामान की होती है और लाखों का सामान दिया जाता है। इसमें समस्या यह होती है कि डॉक्टर ऑपरेशन के समय इंप्लांट का साइज नापता है, जो फिट होता है उसे लगा देता है। यह तरीका पिछले 20 सालों से अपनाया जा रहा है, अब नये निदेशक इस बचे सामान पर पकड़वा रहे हैं। पिछले 25 दिनों से लाखों का सामान जब्त है और अधिकारी मिल भी नहीं रहे हैं। यदि अधिकारी को यह तरीका पसंद नहीं है तो वह नया तरीका या नियम बनाएं, हम उसे मानने को तैयार हैं। महंगा सामान मरीज को देने की बजाए खुद देने के लिए जाना पड़ता है। इस संबंध में उन्होंने सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर से भी बात की है, उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस मौके पर राजेश नरवाल, सोमनाथ सहगल, गगन, सुशील, रोहित भुटानी, अजय, नवीन आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें