डेडलाइन खत्म, 24 प्रतिशत पशु घूम रहे सड़कों पर
चरखी दादरी।
जिले को कैटल फ्री बनाने के लिए डीसी द्वारा अधिकारियों को दी गई डेडलाइन मंगलवार को खत्म हो गई। फिलहाल जिले से करीब 76 प्रतिशत लावारिस गोवंश ही पकड़े गए हैं जबकि 24 प्रतिशत अभी भी खुले में घूम रहे हैं। पशु पालन विभाग, नगर परिषद व पंचायत विभाग के प्रयासों से संतुष्ट डीसी विजय सिद्प्पा ने उन्हें दो दिन की मोहलत बाकी बचे पशुओं को पकड़ने के लिए भी दे दी है। इसके अनुसार डीसी की अब अगली डेडलाइन 28 सितंबर रहेगी जबकि सरकार ने डीसी को जिले को लावारिस गोवंशों से मुक्त बनाने के लिए 30 सितंबर तक का समय दे रखा है। वहीं, प्रशासन जल्द ही नए पशुबाड़े भी खोल सकता है जबकि कलियाणा पशुबाड़े में बुधवार से पशु छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वहीं, शहर में तीन रोज पूर्व खोली गई नंदीशाला में भी करीब 250 पशु पकड़ कर छोड़े जा चुके हैं।
जानकारी के अनुसार डीसी विजय सिद्प्पा ने पिछले सप्ताह नगर परिषद, पशु पालन विभाग व पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जिले को 26 सितंबर तक कैटल फ्री बनाने के निर्देश दिए थे। बैठक में डीसी ने हिदायत दी थी कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी इस काम में ढिलाई बरतता या फिर पंचायतों को भड़काता पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बैठक में डीसी ने नगर परिषद सचिव संजय यादव व चेयरमैन संजय छपारिया को शहर में नंदीशाला का प्रबंध करने के भी निर्देश दिए थे। इन निर्देशों की पालना करते हुए नप अधिकारियों ने मार्केटिंग बोर्ड के पुराने कार्यालय की करीब एक एकड़ जमीन पर नंदीशाला बनाने की प्लानिंग तैयार कर 24 घंटे में इसे अमलीजामा भी पहना दिया था। शहरी पशुओं को अग्रसेन धर्मशाला के सामने स्थित नंदीशाला में ही छोड़ा जा रहा है। डीसी ने बताया कि नगर परिषद, पंचायत विभाग व पशु पालन विभाग से अभियान की अपडेट रिपोर्ट तबल करन के बाद पशु पालन विभाग के आंकड़ों अनुसार जिले के 74 प्रतिशत लावारिस गोवंश को पकड़कर इन्हें नंदीशालाओं में छोड़ने की बात सामने आई है। इसलिए इन विभागाध्यक्षों को आगामी डेडलाइन 28 सितंबर दी गई है। उनका कहना है कि सरकार ने जिला प्रशासन को 30 सितंबर की डेडलाइन दे रखी है। उन्होंने दावा किया कि हर हाल में 30 सितंबर से पहले जिले को कैटल फ्री बना दिया जाएगा।
शहर में दो सौ ग्रामीण क्षेत्रों में बचे 650 पशु
डीसी विजय कुमार सिद्प्पा ने बताया कि पिछले तीन दिनों में शहर स्थित नंदीशाला में 250 लावारिस पशु पकड़कर छोड़े जा चुके हैं और इनकी टैगिंग का काम भी पशु पालन विभाग साथ-साथ कर रहा है। डीसी ने बताया कि फिलहाल शहर में करीब 200 लावारिस पशु और बचे हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्र में फिलहाल 650 से 700 लावारिस पशु हैं।
जिला प्रशासन के पास पहुंची 15 लाख की ग्रांट
डीसी विजय सिद्प्पा ने बताया कि लावारिस गोवंश के लिए पुख्ता प्रबंध करने के लिए हाल ही में प्रशासन के पास 15 लाख की ग्रांट पहुंची है। उन्होंने बताया कि यह ग्रांट गोसेवा आयोग से दिलाने के लिए उन्हें सरकार को पत्र लिखा था। डीसी ने बताया कि यह ग्रांट जारी हो चुकी है और फिलहाल प्रशासन ने इस रिजर्व रखा है। इस ग्रांट का उपयोग कियी अन्य गांव में पशुबाड़े की व्यवस्था करने में किया जाएगा।
अटेला में पंचायती ग्रांट से तो कलियाणा में डोनेशन से तैयार की नंदीशाला
डीसी विजय सिद्प्पा ने बताया कि इस समय जिले में तीन नंदीशालाएं प्रशासन ने बनाई हैं। इनमें एक नंदीशाला अटेला गांव में तीन एकड़ जमीन में खोली गई है और इसकी व्यवस्था पंचायती ग्रांट से की गई है। डीसी ने बताया कि यहां प्रशासन ने करीब 400 पशु शिफ्ट किए हैं। इनके अलावा शहर की अग्रसेन धर्मशाला के सामने स्थापित नंदीशाला में इस समय करीब 250 पशु पकड़ कर छोड़े गए हैं। डीसी ने बताया कि कलियाणा नंदीशाला डोनेशन से तैयार कराई गई है और बुधवार से ही इसमें पशु छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
नंदीशाला में भी प्लास्टिक की थैलियां खा रहे गोवंश
अग्रसेन धर्मशाला के समीप शुरू की गई नंदीशाला में भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। यहां काफी तादाद में प्लास्टिक की थैलियां पड़ी हैं और बिना रोकटोक गोवंश इन्हें खा रहा है। यहां पड़ी थैलियों की तरफ अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
खानापूर्ति नहीं ढंग से कैटल फ्री किया जाएगा जिला: डीसी
डीसी विजय कुमार सिद्प्पा ने बताया कि जिले को कैटल फ्री बनाने में कोई खानापूर्ति नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि 28 सितंबर तक जिले को कैटल फ्री कर दिया जाएगा और वो खुद प्रेस कांफ्रेंस के जरिए इसकी घोषणा करेंगे। डीसी ने बताया कि यह घोषणा तब की जाएगी जब शहर की नहीं गांवों में भी लावारिस गोवंश खुले में घूमता नजर नहीं आएगा।