रोहतक। 200 बेड वाले नागरिक अस्पताल में अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल फायर सिलिंडर के भरोसे है। अगर अस्पताल में आग लगने जैसी अनहोनी हो जाए तो कोई भाग भी नहीं सकता है। क्योंकि यहां एसएनसीयू के पास निकास द्वार पर ताला लगा हुआ है।
अग्नि सुरक्षा के लिए रेडियम से विशेष तौर पर पथ चिह्नित किया जाता है, ताकि आपात स्थिति में लोग जान बचा सकें। इसके अलावा अस्पताल में प्रवेश करते समय द्वार पर ही पोर्च (द्वारमंडप) है। अस्पताल के पीछे की तरफ अतिक्रमण है, यहां से छोटे और बड़े दोनों ही अग्निशमन वाहनों का अस्पताल के भीतर प्रवेश करना मुश्किल है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अग्निशमन की छोटी गाड़ियां आ सकती हैं। बीते दिनों बीएंडआर की टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था।
अब तक नहीं हुआ है मॉकड्रिल
नागरिक अस्पताल में अब तक मॉकड्रिल भी नहीं किया गया है। मॉकड्रिल एक तरह का अभ्यास होता है, इसमें आपात स्थिति जैसी स्थिति बनाकर स्वयं और दूसरे की रक्षा की जाती है। इस बारे में जानकारी भी दी जाती है।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि फायर सेफ्टी सिर्फ उस बिल्डिंग को कहा जाता है, जहां फायर टेंडर भवन के चारों तरफ घूमने में सक्षम हो। यहां प्रवेश द्वार में पोर्च है, इसलिए फायर टेंडर भीतर नहीं जा सकेगी। अस्पताल के पीछे की तरफ अतिक्रमण है। यही कारण है कि आग लगने और अनहोनी की सूरत में अस्पताल में मौजूद लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
पोर्च में फंस जाएगी फायर ब्रिगेड की गाड़ी
अग्नि सुरक्षा और रोकथाम के नाम पर अस्पताल में 40 फायर सिलिंडर लगे हैं। इनके भरोसे पूरा अस्पताल है। फायर ब्रिगेड की गाड़ी तो प्रवेश द्वार बने पोर्च में फंसकर ही रह जाएगी। सूत्रों की माने तो फायर सेफ्टी के लिए प्रशिक्षित अधिकारी व कर्मचारी भी नियुक्त नहीं है, ताकि तत्काल प्रभाव से आग को बुझाने के प्रयास किए जा सके। फायर ब्रिगेड जब तक पहुंचेगी तब तक तो बहुत अनहोनी हो सकती है।
अस्पताल में आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में फायर सिलिंडर हैं। आपात स्थिति में अग्निशमन की छोटी गाड़ियां आ सकती हैं। फायर रोकने की पर्याप्त व्यवस्था है। अस्पताल के पीछे की तरफ अतिक्रमण है, लेकिन इसको हटाने के लिए अस्पताल की दीवार तोड़ने की जरूरत पड़ेगी।
-डॉ. पुष्पेंद्र चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल