जिले में कुत्ते और बंदरों का आतंक है। स्थिति यह है कि 200 से 250 लोगों को प्रतिदिन रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। सरकारी अस्पताल में बीपीएल के लिए टीका निशुल्क है और अन्य को प्रति टीका 100 रुपये देने होते हैं। जबकि बाजार में सरकार की ओर से तय कीमत 350 रुपये में यह टीका उपलब्ध है। सरकारी स्टाक की बात करें तो स्टोर में रेबीज का टीका उपलब्ध नहीं है। दावा किया जाता है कि आपात विभाग में आने वाले मरीज को पहली डोज निशुल्क लगा दी जाती है। शहर में आवारा कुत्तों व बंदरों ने आमजन का जीना मुहाल कर रखा है। सरकारी सिस्टम ना तो इन पर लगाम लगा पा रहा है और ना ही पीड़ितों को समय पर रेबीज का टीका उपलब्ध करवा पा रहा है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि वह प्रति माह 950 के हिसाब से रेबीज का इंजेक्शन मंगवाते हैं। यह कुत्तों व बंदरों के काटने पर लगाया जाता है। इन दिनों रैगुलर सप्लाई में टीका कम होने के चलते आपात विभाग में आने वाले मरीजों को पहली डोज वहीं से लगाई जा रही है। सोमवार को इसका स्टाक मंगाया जाएगा। आपात विभाग में अभी 50 के करीब टीके की डोज रखी है। टीका लगवाने वाले व्यक्ति की 100 रुपये की पर्ची काटी जाती है। यदि मरीज बीपीएल परिवार से है तो टीका निशुल्क लगाया जाता है।
200 के करीब टीके बिक रहे प्रतिदिन : कत्याल
मेडिसिन मार्केट के प्रधान सतीश कत्याल ने बताया की रेबीज के टीकों पर कंट्रोल रेट 350 रुपये का है। रिटेल में 300 तक बेचा जाता है। सरकार ने इसकी कीमत तय कर रखी है। 300 रेबीज का टीका प्रतिदिन झज्जर, महम, कलानौर, गोहना, सांपला, लाखन माजारा, खरखौदा जाता है। इसके अलावा रोहतक से भिवानी और जींद वाले भी टीका मंगाते हैं। बात रोहतक जिले की करें तो यहां प्रतिदिन 200 टीकों की खप्त है।
तीन से पांच लगते हैं टीके
यदि कुत्ता पालतू है और दस दिन न नहीं मरता तो तीन टीके लगते हैं। यदि ऐसा नहीं है तो पांच टीके लगते हैं। इसमें पहले दिन पहली डोज, दूसरी डोज तीसरे दिन, तीसरी डोज सातवें दिन, चौथी 14वें व पांचवीं डोज 28वें दिन लगती हैं।