रोहतक। रेलवे के अधिकारियों ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में एक सप्ताह का समय तो दे दिया मगर कुछ देर बाद ध्यान आया कि उच्चाधिकारियों को अभियान के नहीं चलने की रिपोर्ट भी देनी है। एईएन सुमन बल्हारा और एक्सईएन वैभव पाठक ड्यूटी मजिस्ट्रेट गुलाब सिंह के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमको लिखकर दे दिया जाए कि मामला केबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जिसमें जमीन देने को लेकर फैसला होगा। इस वजह से एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस पर मजिस्ट्रेट ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट बनाएं, जिसमें उनका, व्यापारी नेता, पार्षद और लोगों के नाम स्वयं लिख लें।
सोमवार को जितनी जमीन कब्जाई है, पूरी खाली करवाएंगे
रेलवे अधिकारियों ने व्यापारी नेता व पार्षद से साफ शब्दों में कह दिया है कि सोमवार को उनकी टीम आएगी। तब भी वह मंत्री, डीसी, एसपी व निगम कमिश्नर को बताकर आएंगे क्योंकि लॉ ऐंड आर्डर की स्थिति उन्हीं को संभालनी है। मगर इतना तय समझ ले कि तोड़फोड़ उतनी ही होगी जितनी जमीन कब्जाई गई है। इसमें किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
रेलवे को हर रोज हो रहा है छह लाख रुपये का नुकसान
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि छह माह से कब्जाई जमीन मुक्त नहीं होने की वजह से रेलवे को छह लाख रुपये हर रोज का नुकसान हो रहा है। रेलवे अब ज्यादा नुकसान झेलना नहीं चाहता है। असल में, जिस गति से एलिवेटेड ट्रैक निर्माण का काम होना चाहिए, जमीन खाली नहीं होने की वजह से हो नहीं पा रहा है, जिसकी वजह से रेलवे को नुकसान हो रहा है।
प्लीज, किसी को भी कांग्रेसी या भाजपाई नहीं लिखे
रेलवे अधिकारियों ने जब उच्चाधिकारियों को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में नाम अंकित करने के बाबत पूछा तो व्यापारियों ने कहा कि वह केवल नाम लिखे। ये नहीं लिखे कि कांग्रेसी नेता या भाजपाई क्योंकि इसके लिखने के बाद मामला राजनीतिक का हो जाता है। हम नहीं चाहते कि इसका किसी भी तरह से राजनीतिकरण हो। जब यह मामला सिर्फ और सिर्फ सीधे जनता से जुड़ा है।
व्यापारी नेता ने चीख-चीखकर कहा अब छत से मत गिराओ
व्यापारी नेता बार-बार रेलवे अधिकारियों के सामने चीखकर कह रहा था कि भई यह मामला सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के संज्ञान में हैं और वह व्यापारियों को जमीन दिलवाने के लिए वचन दे चुके हैं। व्यापारियों को जमीन देने के बाबत मामला केबिनेट तक पहुंच गया है। जल्द ही जमीन को लेकर फैसला हो जाएगा। गुजारिश है कि वह अपनी कार्रवाई रोक दें ताकि मंत्री की बात कह सके।
रेलवे अपनी जमीन की रक्षा नहीं करता तो कोई क्या करे
पार्षद ने रेलवे अधिकारियों से कहा कि गांधी कैंप 1954 में नगर निगम ने बसाया था और रेलवे लाइन 1960 में डाली गई है। ऐसे में अब रेलवे को अपनी जमीन की याद आई है। जब रेलवे अपनी जमीन की रक्षा नहीं कर सकता तो लोगों का क्या दोष है। इस पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे तो किसी का भी माल हड़प लो। रेलवे अधिकारी सुमन बल्हारा ने कहा कि रेलवे की पूरे देश में दो लाख किमी. जमीन है, क्या जमीन की ही देखरेख की जाएगी। जब जमीन की जरूरत होगी तभी रेलवे अपनी जमीन लेगा।