रमजान के दूसरे जुमे में नमाज के लिए उमड़े अकीदतमंद
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
रमजान के दूसरे जुमे में नमाज अदा करने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। जगह की कमी और लोगों की अधिकता की वजह से शीशे वाली मस्जिद में दो बार नमाज अदा की गई। पहली जमात सवा एक बजे और दूसरी जमात सवा दो बजे हुई।
शहर के बीच स्थित लाल मस्जिद में भी जुमे की नमाज हुई लेकिन जगह की कमी यहां भी खली और लोग नमाज के लिए जगह न मिलने से परेशान होकर दूसरी मस्जिदों की ओर रुख कर गए। खोखराकोट स्थित मस्जिद में हुई जुमे की नमाज में भी नमाज के लिए जगह कम पड़ गई। नमाज के बाद लोगों की खैरियत, रोजे और नमाज की मकबूलियत, बीमारों की शिफा, मरहूमों की मगफिरत और मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआ की गई।
जगह की कमी और खुले में नमाज पर प्रतिबंध के कारण शीशे वाली मस्जिद में दो बार पढ़ाई जा रही जुमे की नमाज
- 20 हजार की आबादी के लिए शहर में हैं सिर्फ तीन मस्जिदें, जिनमें हो पाती है लगभग पांच हजार लोगों की नमाज
अज़ीम अंसारी
रोहतक।
रमजान का महीना मुस्लिमों के लिए इबादत का महीना होता है। इस महीने में अकीदतमंद रोजे रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं। दिन में पांच वक्त की नमाज के अलावा जुमे (शुक्रवार) को होने वाली जमात (सामूहिक नमाज) का बहुत महत्व है। ये हर मुसलमान पर फर्ज है। इसीलिए पांच वक्त की नमाज न पढ़ने वाला भी जुमे की नमाज में शामिल होता है।
रोहतक शहर में तीन मस्जिदें हैं। एक खोखराकोट में है, जहां समुदाय का कब्रिस्तान भी है। शहर के बीच लाल मस्जिद है जो छोटे से हिस्से में तीन मंजिल बनी हुई है। जिसमें लगभग 500 लोगों की नमाज हो पाती है। शहर की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक शीशे वाली मस्जिद जो चमेली मार्केट में है, इन तीनों मस्जिदों में सबसे बड़ी है लेकिन वहां भी लोगों को नमाज पढ़ने की जगह नहीं मिल पाती। इसी वजह से मस्जिद प्रबंधन ने दो बार जुमे की नमाज पढ़ाने का फैसला लिया। ये दोपहर सवा एक और सवा दो बजे होती है।
तंग जगह में व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमेटी के लोग करते रहते हैं मशक्कत
जुमे की नमाज के दौरान शीशे वाली मस्जिद में भारी भीड़ जुटती है। जगह न होने के कारण यहां दो बार में नमाज होती है। व्यस्त बाजार चमेली मार्केट के अंदर होने के कारण तंग गली से ही लोगों को आना-जाना होता है। रास्ते में रुकावट न बने और आवाजाही बनी रहे इसके लिए अब्दुल वाहिद, अली अहमद, मोहम्मद अजीम, असलम साबरी आदि कमेटी के लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। एक लाइन नमाज पढ़कर आने वालों की और एक जाने वालों की बनाने के बाद आधी गली रास्ता निकलने के लिए छोड़ी जाती है। लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल भरा काम है।
खुले में नमाज पर प्रतिबंध से बढ़ी मुश्किलें
शीशे वाली मस्जिद में नमाज पढ़ने आये खोखराकोट के मोहम्मद राशिद, अलीम खान, रेहान अंसारी, परवेज आलम आदि ने बताया कि जगह न होने की वजह से लाल मस्जिद में जगह नहीं मिली। बाजार में ही खड़े रह गए। खुले में नमाज पर प्रतिबंध के कारण जमात के साथ नमाज नहीं पढ़ पाए। अगर दूसरी जमात वक्त पर शीशे वाली मस्जिद में न पहुंच पाते तो नमाज नहीं मिलती। हमारे साथ और कुछ लोग भी थे लेकिन उन्हें यहां भी जगह नहीं मिल पायी।
शहर में सिर्फ तीन मस्जिदें हैं और जगह भी बहुत कम है, इसीलिए नमाज पढ़ने आये लोगों को परेशानी होती है। हमने कमेटी के साथ बैठक कर रमजान में दो बार जुमे की नमाज पढ़ाने का फैसला लिया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग नमाज में शामिल हो पाएं।
- अब्दुस्सलाम, इमाम, शीशे वाली मस्जिद
लाल मस्जिद में काफी कम जगह है और तीन मंजिला होने के बाद भी बहुत कम लोग यहा नमाज पढ़ पाते हैं। पिछले साल तक अगर किसी को नमाज नहीं मिलती थी तो वह बाहर सड़क पर फर्ज पूरा कर लेता था। अब लोगों की नमाज छूट जाती है।
- मोहम्मद तस्लीम, इमाम, लाल मस्जिद
कोई भी सड़क पर नमाज नहीं पढ़ना चाहता। नमाज के लिए जगह का पाक-साफ होना जरूरी है। लेकिन जगह न होने की मजबूरी में जमात के पीछे खुले में नमाज पढ़ी जाती थी। अब उस पर भी प्रतिबंध है। वक्फ बोर्ड की जगह या तो बंद पड़ी है या कब्जाई गई हैं। अगर सरकार वक्फ की जगह भी खाली करा दे तो नमाज पढ़ने में परेशानी न हो।
- मोहम्मद अजीम, कमेटी सदस्य, शीशे वाली मस्जिद