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नील गाय का बच्चा

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फ्लैग : एग्री लीडरशिप मेले में भालौठ का रामचंद्र हुड्डा अपने पालतू नील गाय के बच्चे को लेकर पहुंचा
हेडिंग : पुकारते ही मोनू कूदकर आ जाता है मालिक के पास
: वन विभाग के अधिकारी पहुंचे मौके पर, लेकिन चम्मच से पानी पीने की आदत आई जंगल में छोड़ने के आड़े
: वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत नहीं बना सकते पालतू
: रामचंद्र बोला, मैंने तो एक दिन का पालकर बचाई थी जान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
तृतीय एग्री लीडरशिप सम्मिट में उस समय हड़कंप मच गया, जब वन प्राणी विभाग को सूचना मिली कि मेले के अंदर नील गाय का बच्चा घुसकर घायल हो गया है। विभाग के अधिकारी एंबूलेंस लेकर पहुंच गए। बाद में पता चला कि भालौठ गांव का रामचंद्र हुड्डा अपने पालतू नील गाय के बच्चे को लेकर घूम रहा है। जब उसे जंगल में छोड़ने के लिए कहा तो रामचंद्र बोले, आठ माह के बच्चे को चम्मच से पानी पीने की आदत है। अगर ऐसे छोड़ा तो मर जाएगा। जब वन विभाग के अधिकारी नील गाय के बच्चे को रामचंद्र के पास छोड़ने के लिए तैयार हुए।
रामचंद्र ने बताया कि 8 माह पहले गांव का युवक संजय खेत में गया हुआ था। उसने ईख के खेत में देखा कि कुत्ते नील गाय के बच्चे के पीछे पड़े हैं। बच्चे का जन्म एक दिन पहले ही हुआ था। वह बच्चे को लेकर गांव में आ गया और रामचंद्र हुड्डा के घर यह कहकर छोड़ दिया कि उसका मकान बड़ा है। पहली रात उसने चम्मच से दूध पिलाया। अगले दिन किसी ने बताया कि निपल से दूध पिलाने का प्रयास करो। अब वह दो से तीन किलो गाय का दूध पीता है। साथ ही आग के अंदर बेरी व अमरुद के पत्ते खाता है। उसने उसका नाम मोनू रखा है। साथ ही बच्चों की तरह रखता है।
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सीढ़ियों में चढ़ जाता है मोनू
रामचंद्र ने बताया कि वह एलआईसी एजेंट का कार्य करता है। गांव में जब किस्त के पैसे लेने जाता है तो मोनू उसके साथ जाता है। यहां तक दो मंजिल तक सीढ़ियों के रास्ते छत पर चढ़ जाता है। साथ ही आसानी से उतर जाता है। जब उसे नाम से पुकारते हैं तो तुरंत भाग कर आ जाता है। बाइक के साथ-साथ खेत में आता-जाता रहता है। वे घर में उसे खुला रखते हैं।
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जान बचाना जुर्म नहीं, वन प्राणी विभाग को अवगत करा दिया
एलआईसी एजेंट का कहना है कि उसे पता है कि वन्य प्राणी अधिनियम के तहत नील गाय को पालतू बनाकर नहीं रख सकते, लेकिन उसने बच्चे की जान बचाई है। साथ ही बच्चे की तरह परवरिश की है। एडीसी से लेकर वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों तक को स्थिति से अवगत करवा दिया है। उसे भी पता है कि अब तो मोनू छोटा है, लेकिन बड़ा होने पर रखने में दिक्कत आएगी। ऐसे में जिला प्रशासन को हर स्थिति से अवगत कराया है। जब वह खुद पानी पीने लगेगा, उसे विभाग के हवाले कर दिया जाएगा।
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