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चौधर की चाहत में धूमिल हो रही धरती के भगवानों की महिमा

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50 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ ट्रॉमा सेंटर, संस्थान की भीतरी राजनीति शुरू
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फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
50 करोड़ की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर के चौधर की चाहत धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की महिमा को धूमिल कर रही है। क्योंकि इसके शुभारंभ से पहले ही यहां संस्थान की भीतरी राजनीति शुरू हो गई है। इसका परिणाम यहां आने वाले बेगुनाह मरीजों को भुगतनी पड़ रही है। कटकटाती सर्दी में मरीजों को उपचार के लिए इधर से उधर धक्के खाने पड़ रहे हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में चौधर के लिए जंग होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब तक इससे मरीज सीधे प्रभावित नहीं होते थे। लेकिन नव वर्ष के शुभारंभ होते ही आपातकालीन विभाग और ट्रॉमा सेंटर में चौधर की जंग में मरीज प्रभावित हो रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों को कभी ट्रॉमा सेंटर आना पड़ रहा है तो कभी आपातकालीन विभाग। सोमवार को रात भर मरीजों को उपचार के लिए चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ा। यही स्थिति मंगलवार को दिन में बनी रही। ट्रॉमा सेंटर में कहने के लिए डॉक्टरों की तैनाती की गई थी, लेकिन मरीजों के साथ टाल-मटोल ही की जा रही थी। संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों के दावे ट्रॉमा सेंटर शुरू होने के दूसरे दिन भी कागजी साबित होते रहे। अधिकारी बैठकों में ही समस्या का समाधान करने का हल तलाशते रहे, जबकि हकीकत में मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। चर्चा में है कि ट्रॉमा सेंटर के अलावा आपात कालीन विभाग में इमरजेंसी मेडिसन की चौधर की जंग भी शुरू हो गई है। चर्चा है कि संस्थान में काम करना कोई नहीं चाहता, सभी को बस पद की लालसा है।
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डॉक्टरों का मसला सुलझा नहीं नर्स भी आक्रोशित
डॉक्टरों का मसला अभी सुलझा भी नहीं था कि नर्सों का गुस्सा सातवें आसमान पहुंच गया है। यहां प्रशासन ने नर्सोें से उनका चेंजिंग रूम ले लिया है। इस पर गुस्साई नर्सों ने मंगलवार को सायं अव्यवस्थाओं पर रोष जताया है। नर्सोें का कहना है कि वह अपनी ड्रेस कहां चेंज करेंगी। नर्सिंग एसोसिएशन के प्रधान अशोक यादव ने कहा है कि पिछले छह माह से ट्रॉमा सेंटर चलाने के लिए नर्सों ने मेहनत की। अब ट्रॉमा सेंटर शुरू होते ही नर्सों से उनका चेंजिंग रूम तक छीन लिया गया है। उनकी मांग है कि डॉक्टरों की तरह नर्सों को उनका चेंजिंग रूम मिलना चाहिए। इसकी यहां व्यवस्था भी है, लेकिन कुछ लोग जबरन अपनी मर्जी थोपना चाह रहे हैं।

देर सायं जारी रही अधिकारियों की बैठक
ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी विभाग से काम कराना प्रशासन के लिए चैलेंज बना हुआ है। यहां मंगलवार कहने के लिए पीजी डॉक्टर आ तो गए थे, लेकिन मरीजों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। मजबूरी में संस्थान के आला अधिकारियों ने मंगलवार को सायं फिर बैठक की और हल निकालने का प्रयास किया। सूत्रों की मानें तो सर्जरी विभाग ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी बनाए गए न्यूरो सर्जन डॉ. ईश्वर के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं है। जबकि कुलपति डॉ. ओपी कालरा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद पहले ही डॉ. ईश्वर के कार्य को देखते हुए उन्हें इसका प्रभारी बना चुके हैं। अब स्थिति यह है कि ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी विभाग काम करने को ही तैयार नहीं है।

रोटेशन न होना बन गया सिरदर्द
पीजीआईएमएस में न तो पीजी डॉक्टरों की रोटेशन है और न ही विभागाध्यक्षों की। अब यही समस्या संस्थान के अधिकारियों की मुसीबत बन गई है। क्योंकि सर्जरी के पीजी डॉक्टर अपने विभाग के अलावा किसी की मानने को तैयार नहीं है और विभागाध्यक्ष की बात काटने की सर्जरी विभाग में किसी की हिम्मत भी नहीं है। स्थिति यह है कि सर्जरी विभाग के मरीजों को भी न्यूरो सर्जरी के डॉक्टरों के पास भेजा जा रहा है। स्पष्ट शब्दों में कहें तो सर्जरी और न्यूरो सर्जरी विभाग में सीधी जंग शुरू हो गई है। सूत्रों का दावा है कि सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरके कड़वासरा न्यूरो सर्जन डॉ. ईश्वर के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि ट्रॉमा सेंटर शुरू होने से पहले आपातकालीन विभाग के आपरेशन थियेटरों के इंचार्ज डॉ. कड़वासरा थे। वह डॉ. ईश्वर से काफी सीनियर भी हैं। लेकिन प्रशासन के निर्देशों पर डॉ. ईश्वर ने ट्रॉमा सेंटर की कमान संभाली और वर्षों से धूल फांक रहे ट्रॉमा सेंटर का शुभारंभ कराया। अब जब ट्रॉमा सेंटर शुरू हो गया है तो उसकी चौधर के लिए कई नाम सामने आने लगे हैं। हालांकि, डॉ. आरके कड़वासरा ने बातचीत के दौरान ट्रॉमा सेंटर का प्रभारी डॉ. ईश्वर को बनाए जाने पर किसी भी आपत्ति से इंकार कर दिया था।

24 घंटे बाद मरीज का किया आपरेशन
ट्रॉमा सेंटर के चौधर की जंग का खामियाजा मरीज कैसे भुगतते हैं, इसका उदाहरण बने सोनीपत रिहाड़ा से आए विकास। विकास का घुटना सड़क दुघर्टना में फट गया था, उन्हें उपचार के लिए सोमवार को लाया गया था। मंगलवार सात बजे तक उनका आपरेशन नहीं किया गया। जब विवाद होने की आशंका हुई तो डॉक्टर विकास को आपरेशन थियेटर में ले गए। मरीज के परिजनों ने बताया कि यदि ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे बाद उपचार होगा तो किसकी जान बचेगी, सभी जानते हैं। पूरे प्रकरण में सीधे तौर पर कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।
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शिफ्टिंग के चलते आ रही समस्या
कहीं कोई समस्या नहीं है। आपातकालीन विभाग से ट्रॉमा सेंटर में शिफ्टिंग हो रही है। इसके चलते समस्या आ रही है। आपात विभाग और ट्रॉमा सेंटर दोनों जगह सर्जरी के डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहे हैं। अभी दोनों जगह मरीज आ रहे हैं, सभी का उपचार हो रहा है। सभी विभागों के साथ बातचीत करके उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। जल्द ही सारी स्थिति सामान्य हो जाएगी।
- डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, पीजीआईएमएस रोहतक
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