परियोजना कर्मियों ने किया प्रदर्शन
चरखी दादरी।
जन कल्याणकारी योजनाओं के निजीकरण, आंगनबाड़ी, आशा व मिड-डे मिल कर्मियों को पक्का करने, 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन लागू करने, महंगाई मुताबिक वेतन बढ़ोतरी की मांगों के लिए मंगलवार को परियोजना कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान कमलेश व मिड-डे-मील वर्कर प्रधान सुदेश रिवासा ने प्रदर्शन की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। संचालन आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन की नेता राजबाला ने किया।
सीटू राज्य सचिव सुरेखा ने कहा कि पिछली सरकार ने 45वें श्रम सम्मेलन में सभी परियोजना कर्मियों को पक्का करने की हामी भरी थी और इसे अधर में ही लटका दिया। अब मौजूदा सरकार तीन साल का कार्यकाल बीतने के बावजूद मांगों को पूरा करने में गंभीर नजर नहीं आ रही। भाजपा सरकार अलग-अलग परियोजनाओं में काम कर रही देशभर की एक करोड़ महिलाओं के रोजगार से खिलवाड़ करना चाहती है। इसलिए मिशन बोर्ड के नाम पर आईसीडीएस का निजीकरण करना चाहती है। मिड-डे-मील के काम को पंचायतों के अधीन सौंप दिया गया है व एनआरएचएम के काम को भी एनजीओ को सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसे परियोजना कर्मचारी किसी भी सूरत में सहन नहीं करेंगे। इस अवसर पर सीटू जिला सचिव अनिल कुमार, सर्व कर्मचारी संघ नेता मा. सुखदर्शन, सीटू नेता धर्मबीर कुंगड़, रामफल देशवाल, संतोष ग्रेवाल, किताब कौर, ईश्वर, दर्शना बलियाली, पिंकी चांग, कृष्णा मानहेरू, निर्मला जेवली, कैलाश ने भी अपने विचार रखे।