रोहतक। पार्षदों को अपने वार्ड में 10 लाख तक के विकास कार्य करवाने के लिए अब निगम की ओर नहीं ताकना पड़ेगा। वार्ड कमेटी बनाकर पार्षद मनमर्जी से सार्वजनिक विकास कार्य करवा सकते हैं। इसके लिए 60 प्रतिशत फंड नगर निगम देगा, जबकि 40 प्रतिशत पैसे का जुगाड़ वार्ड कमेटी को खुद करना पड़ेगा। चाहे इसके लिए चंदा एकत्रित करें या किसी नेता या सांसद निधि कोष से राशि लेकर आए। शहरी निकाय विभाग ने इसके लिए राजीव गांधी शहरी भागीदारी योजना लागू कर दी है। इसके लिए एक दिन पहले प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को पत्र भेजा गया है।
2008 में प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों के अंदर शहरी भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष योजना तैयार की थी। इसे अब भाजपा सरकार ने लागू किया है। योजना के तहत वार्ड के अंदर कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा 10 व्यक्ति कमेटी या एरिया सभा का गठन कर सकते हैं। इसका चेयरमैन वार्ड पार्षद होना चाहिए। सदस्यों का चयन निगम की ओर निगम, नप या नपा की ओर से किया जाएगा। कमेटी के सभी सदस्य संबंधित एरिया के मतदाता होने चाहिए।
ये काम कर सकेगी वार्ड कमेटी
कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण और संचालन।
नगर निगम पार्कों को विकसित करना।
सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण।
पशुओं के लिए तालाबों का निर्माण।
स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत करवाना।
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था करना।
पेयजल की व्यवस्था करना।
स्लम एरिया में मात्र 20 प्रतिशत फंड
योजना के तहत वार्ड कमेटी को 40 प्रतिशत फंड का जुगाड़ खुद करना होगा। लेकिन शहरी एरिया की स्लम बस्तियों और अनुसूचित जाति के एरिया में 20 प्रतिशत फंड एकत्रित करने की शर्त रहेगी। बाकी फंड निगम की ओर से दिया जाएगा। कमेटी पंजीकरण सोसायटी, ट्रस्ट, रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन, नेबरहुड ग्रुप, यूथ क्लब और मार्केट कमेटियों की तरह काम करेगी। जोे काम वार्ड कमेटी करवाएगी, उसका पेमेंट निगम की कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद होगा। साल के आखिरी में वार्ड कमेटी को अपने रिकार्ड का आडिट करवाना होगा।
भागीदारी के लिए आगे आएं पार्षद
सरकार की ओर से वीरवार को राजीव गांधी शहरी भागीदारी योजना के तहत पत्र आया है। इसके तहत वार्ड पार्षद की अध्यक्षता में कमेटी गठित हो सकती है। निगम पार्षदों को इसके लिए आगे आना चाहिए।
- कृष्ण कुमार वार्ष्णेय, डीटीपी नगर निगम।
सोमवार को प्रोजेक्ट जमा करवा दूंगा
2008 में जनभागीदारी एक्ट बना था, जिसके तहत मैंने तो पहले की जनहित कमेटी वार्ड नंबर 14 बना ली थी। इसका पंजीकरण हो चुका है। सोमवार को कमेटी की ओर से प्रोजेक्ट निगम कार्यालय में सरकार के पास मंजूरी के लिए पेश कर दिया जाएगा।
- नरोतामल भटनागर, पूर्व पार्षद वार्ड नंबर-14
राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए
पहले भी सरकार का पत्र आया था। वार्ड नंबर-10 और 14 में सबसे पहले वार्ड कमेटी बनी थी, लेकिन कोई काम नहीं दिया गया। सरकार की योजना सही है, लेकिन उसके अंदर राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए।
- अशोक खुराना, पार्षद वार्ड-10