फोन पर एटीएम ब्लॉक होने के नाम पर ठगी का नेटवर्क, खंगाल रहे खाते
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बैंक खातों और एटीएम कार्ड की डिटेल लेकर ठगी करने वालों का जाल लगातार सक्रिय है। कानूनी पचड़ों के कारण ठगों पर लगाम लग नहीं पा रही है और जागरूकता के अभाव में लोग लगातार ठगे जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है। एक शातिर ने बैंक अधिकारी बनकर गढ़ी बोहर के अशोक से उनके खाते की डिटेल ले ली। पलक झपकते ही खाते से 80 हजार रुपये निकाल लिए। इस संबंध में अर्बन एस्टेट थाने में अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। पिछले महीनों में तीस से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
पुलिस को दी शिकायत में अशोक ने बताया कि 9 जून को उसके मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले युवक ने खुद को एक निजी बैंक का अधिकारी बताया। इसके बाद आरोपी ने अशोक से कहा कि उनका खाता और एटीएम कार्ड ब्लॉक होने वाले हैं। खाता अपडेट करने के लिए कुछ डिटेल देनी होगी। पहली बार तो अशोक ने इनकार कर दिया। आरोपी ने फिर से फोन किया तो अशोक झांसे में आ गया। इसके बाद अशोक ने आरोपी को खाते और एटीएम कार्ड की डिटेल दे दी। कुछ ही देर बाद ठग ने अशोक के खाते से 80 हजार रुपये निकाल लिए। इसके बाद अशोक ने संबंधित बैंक और पुलिस थाने को मामले की शिकायत दी।
जिले में सामने आये करीब 30 मामले
जिले में पिछले तीन महीने में आनलाइन ठगी के करीब 30 मामले सामने आ चुके हैं। हैरत की बात यह है पिछले डेढ़ साल से ऐसे एक भी केस में पुलिस कोई गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। 25 मई को ठगों ने पुरानी सब्जी मंडी निवासी हेमलता के खाते से 34 हजार रुपये निकाल लिये थे। यह मामला अभी जांच के फेर में उलझा है। इसी तरह ठगों ने महम के नवीन से बैंक अधिकारी बनकर एटीएम कार्ड की डिटेल लेकर सात हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली थी। ऑनलाइन ठगी के मामलों में लिप्त आरोपियों के पास ठगी के अलग-अलग तरीके होते हैं। कोई फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ग्राहक से उसके खाते और एटीएम कार्ड की जानकारी लेकर ठगी करता है। अब अपराधियों ने पढ़े-लिखे लोगों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
बिहार और छत्तीसगढ़ से चल रहा नेटवर्क
बैंकिंग क्राइम के कई मामलों की जांच में सामने आया है कि ठगी में सबसे ज्यादा सक्रिय आरोपी बिहार और छत्तीसगढ़ के हैं। पश्चिम बंगाल के लोग भी ठगी के धंधे में सक्रिय है। जब पुलिस आरोपियों के मोबाइल नंबर के आधार पर इनकी लोकेशन खंगालती है तो इन राज्यों में लोकेशन मिलती है। पुलिस के मौके पर पहुंचने तक आरोपी फरार हो जाते हैं। बड़े मामलों में आरोपी इंटरनेट कॉलिंग सिस्टम का सहारा लेकर ठगी करते हैं।
ग्राहक से बैंक झाड़ लेता है पल्ला
अक्सर देखने में आया है कि खाते से रुपये निकलने के बाद जब ग्राहक संबंधित बैंक में जाता है तो अधिकारी कुछ मदद करने की बजाए टालमटोल करते हैं। अधिकारी दावा करते हैं कि यदि तकनीकी दिक्कत के चलते ट्रांजेक्शन फेल होती है तो उसकी जिम्मेदारी बैंक लेता है। इसके अलावा जब उपभोक्ता अपने खाते की डिटेल देकर ठगी का शिकार बनता है तो इसमें बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। बैंक अधिकारी परामर्श देते हैं कि कोई भी बैंक अपने ग्राहक से खाते, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड सहित बैंक से जुड़े अन्य दस्तावेज की जानकारी नहीं मांगता।
ये बरतें सावधानी
- चाहे कोई भी आपके पास कॉल करके बैंक संबंधी जानकारी मांगें, उसे बिल्कुल भी जानकारी न दें। क्योंकि बैंक इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मांगता।
- बैंकिंग संबंधी सूचना लेने के लिए आने वाली फोन कॉल करने वाले से बात न करें।
- बैंक में जिस मोबाइल नंबर का पंजीयन कराया है उस नंबर को हमेशा अपने पास रखें। परिजनों को न सौंपे।
- अपने खाते, एटीएम, क्रेडिट, डेबिट कार्ड और बैंक के अन्य दस्तावेज की जानकारी अपने जानकार को भी न दें।
- मोबाइल पर इनाम संबंधी भ्रमित करने वाले कॉल के चक्कर में न फंसें।