नगर निगम में शामिल आठ गांव होंगे निगम से बाहर, फिर से पंचायत बनाने की तैयारी
: 2010 में प्रदेश सरकार ने किया था शामिल
: सरकार के फैसले से अटक जाएंगे 50 करोड़ के विकास कार्य
: निगम पार्षद बोले, पंचायतों के 83 करोड़ व जमीन वापस करे सरकार
: 22 वार्ड बनाने की योजना भी जाएंगी ठंडे बस्ते में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सात साल पहले पूर्व मुख्ममंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राज में नगर निगम में शामिल आठ गांव वापस पंचायत बनेंगे। चंडीगढ़ में गुरुवार को सीएम मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में इस पर मंथन किया गया। सरकार के कदम से निगम के ग्रामीण एरिया से शामिल तीनों पार्षद सकते में हैं। क्योंकि इससे आठों गांवों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो जाएंगे।
17 मार्च 2010 को प्रदेश की हुड्डा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके नगर परिषद रोहतक को भंग करके नगर निगम का दर्जा दे दिया। साथ ही साथ लगते आठ गांवों बोहर, बलियाना, गढ़ी बोहर, खेड़ी साध, पहरावर, कन्हेली, सुनारिया खुर्द व कलां को निगम में शामिल किया था। साथ ही बोहर के 18 करोड़, बलियाना के 28 करोड़, पहरावर के साढ़े 8 करोड़, सुनारिया के 15 करोड़ रुपये शामिल हैं। साथ ही अकेले पहरावर गांव के 20 एकड़ जमीन निगम के पास चली गई।
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खत्म हो जाएगा
अब 19 वार्ड का ही बचेगा निगम, वार्डबंदी प्रक्रिया भी संकट में
नगर निगम की तरफ से 20 से 22 वार्ड बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। एडहॉक कमेट में पांच पार्षदों को भी शामिल किया जा चुका है। अब अचानक प्रदेश सरकार द्वारा निगम में शामिल आठ गांव बाहर करने से निगम का वार्ड नंबर 6, 7 व 19 खत्म हो जाएगा। अब निगम द्वारा 2 वार्ड बढ़ाने की प्रक्रिया भी संकट में आ जाएगी। क्योंकि अब नए सिरे से पूरे निगम का डाटा एकत्रित करना पडे़गा।
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ये बोले पार्षद
सरकार का कदम उल्टा कदम खींचने वाली है। उनके वार्ड में करोड़ों रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। सरकार ने पहले तो उनके गांव की पंचायत के 28 करोड़ रुपये व पंचायती जमीन निगम को दे दी। अब निगम से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जिसका विरोध करेंगे। उनके वार्ड में बलियाना, खेड़ी साध, कन्हेली व पहरावर आते हैं।
उपासना देवी, पार्षद वार्ड नंबर 7
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मेरी समझ में नहीं आ रहा कि प्रदेश सरकार ऐसा क्यों कर रही है। हाईकोर्ट में सोनीपत निगम में शामिल गांवों का केस चल रहा था। रोहतक को लेकर कोई विवाद नहीं था। अगर सरकार उनके वार्ड को खत्म करके पंचायत बनाना चाहती है तो पहले 15 करोड़ की राशि व जमीन वापस करे। उनके वार्ड में बोहर, गढ़ी बोहर व माजरा आते हैं।
सरिता देवी, वार्ड नंबर 6
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सरकार द्वारा गांवों को वापस पंचायत बनाने की सूचना मिली है। अगर ऐसा किया जाता है तो गलत होगा। पहले तो उनके वार्ड में शामिल सुनारिया कलां व खुर्द की पंचायत का 28 करोड़ रुपये निगम ने लिया। ऊपर से पंचायती जमीन में सेक्टर काट लिए। अब वापस पंचायत बनाया जा रहा है, जो नहीं होने देंगे।
लक्ष्मी देवी, पार्षद वार्ड नंबर 19
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निगम में शामिल गांवों को वापस पंचायत बनाने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सरकार से जैसी हिदायत मिलेंगी, वैसे प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
कृष्ण कुमार वार्ष्णेय, डीटीपी नगर निगम
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सात साल बाद विरोध करने वाले अब निगम में चाहते रहना
हुड्डा राज में सात साल पहले जब आसपास के आठ गांवों को निगम में शामिल किया गया, उस समय बलियाना सहित कई गांवों के लोगों ने विरोध किया था। सरकार को मांग पत्र देकर पंचायत ही रखने की वकालत की थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। निगम पार्षद नहीं चाहते कि गांवों को वापस पंचायत बनाया जाए।