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बाजार में चीनी राखियों की बजाय स्वदेशी की बूम

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अमर उजाला ब्यूरो
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धारूहेड़ा।
रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है लिहाजा अलग-अलग डिजाइन की राखियों से बाजार सजने लगे हैं। लेकिन चीन से चल रही तनातनी के बीच इस बार बाजार से चीनी राखियां गायब हैं। वहीं स्वदेशी राखियों की बूम है और लोग इन्हें खूब खरीद भी रहे हैं। सोशल मीडिया पर चीन निर्मित राखियों का प्रयोग नहीं करने के मैसेज वायरल होने के बाद बाजार में चीनी राखियां नजर नहीं आ रही हैं। किसी तरह के नुकसान से बचने के लिए राखियों के फुटकर व्यापारी भी स्वदेश निर्मित राखियां बेच रहे हैं।
रक्षाबंधन पर्व अब कुछ ही दिन दूर है। भाइयों के लिए राखी भेजने के लिए बहनों ने खरीदारी करनी शुरू कर दी है। बाजार में राखियों की कई दुकानें सजी है। आकर्षक डिजाइन में एक से बढ़कर एक राखियां उपलब्ध हैं। लेकिन इस बार चीन के सामान का बहिष्कार होने के कारण चीन द्वारा निर्मित राखियां बाजार में उपलब्ध नहीं है। लोगों के अनुसार भाई-बहन के पवित्र त्योहार पर राखी की कीमत नहीं देखी जाती है बल्कि भावनाएं मायने रखती है। लेकिन चीन से लेकर चल रही तनातनी से लोगों में खासा रोष है।
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दुकानदारों के अनुसार बडे़ लोगों के लिए ब्रेसलेट डिजाइन में स्टोन वाली राखियां हैं तो छोटे बच्चों के लिए कार्टून करेक्टर वाली राखियों की भरमार है। लिफाफे में भेजने के लिए अक्षत रोली और चंदन के छोटे पाउच भी बाजार में बिक रहे हैं। इसके अलावा रोली धागे में कई तरह की राखियां हैं।

चीन द्वारा निर्मित राखियां इस बार नहीं बिक रही हैैं, इसलिए इन्हें न रखनेे का फैसला किया गया है। आगे सेे भी चीन द्वारा निर्मित राखियां नहीं आ रही है। ऐसे मे इस बार स्वदेशी सामान पर ज्यादा जोर है। - पुरुषोत्तम बंसल, व्यापारी
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इस बार लोगों की डिमांड ही स्वदेश में बनी हुई राखियों की है। ऐसे में चीनी राखियों को रखने का कोई सवाल ही नहीं है। सीमा पर तनाव को लेकर लोग चीनी सामान का बहिष्कार कर रहे हैं। - कमल किशोर, व्यापारी
इस बार लोग स्थानीय राखियों को ही ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इसलिए उनकी बिक्री ही ज्यादा है। लोग इस बार ज्यादा जागरूक लग रहेे हैं। - राजबीर, व्यापारी
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