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जीएसटी से 10 करोड़ के विकास कार्य प्रभावित

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जीएसटी से 10 करोड़ के विकास कार्य प्रभावित
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चरखी दादरी। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई जीएसटी दरों की मार दादरी नगर परिषद के विकास कार्यों पर भी पड़ रही है। पिछले माह शुरू हुए शहर में तीन करोड़ के विकास कार्यों पर ब्रेक सा लग गया है। निर्माण कार्य को रोकने का कारण संबंधित एजेंसी व ठेकेदार बढ़ी दरों पर नपा की स्थिति स्पष्ट न होना बता रहे हैं। नई जीएसटी दरों में बढ़ोतरी होने पर नपा अधिकारियों ने एक करोड़ के टेंडर लगाए थे लेकिन किसी भी एजेंसी ने इनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद नगर परिषद ने ये टेंडर दोबारा नहीं लगाए हैं। नपा कार्यकारिणी को जुलाई में चार करोड़ के टेंडर भी लगाने है। इसका दावा चेयरमैन संजय छपारिया ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया था। फिलहाल तो अलॉट किए तीन करोड़ के टेंडरों पर निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। नप ठेकेदार एसोसिएशन सदस्यों का कहना है कि टेंडर पर अगर काम पूरा करेंगे तो उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा। ऐसे में वो दो प्रतिशत सिक्योरिटी राशि देकर ही अपना पीछा छुड़ाना मुनासिफ समझेंगे। वहीं, तीन करोड़ के टेंडर में से करीब 50 लाख के ही विकास कार्य पूरे होने का तर्क भी ठेकेदार एसोसिएशन ने दिया है। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों ने निर्माण कार्यों पर ब्रेक लगते ही ठेकेदारों को नोटिस भी जारी किए है।
11 दिन पूर्व एक जुलाई से लागू जीएसटी दरों में बढ़ोतरी के बाद नगर परिषद के ठेकेदारों की टेंडरों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। हेड ऑफिस से टेंडर की कीमतें बढ़ाने संबंधित कोई पत्र नहीं पहुंचा है। ऐसे में अब नपा ठेकेदारों ने भी विकास कार्यों से अपने हाथ पीछे खींचने शुरू कर दिए है। ज्यादातर ठेकेदार एक सुर में अलॉट हुए टेंडरों को डंप करने का तर्क दे रहे हैं। ठेकेदार सुरेंद्र, मिक्कल, प्रदीप, राजेश, ओमप्रकाश, नरेश यादव, दिनेश वशिष्ठ, संजय शर्मा, नवीन सांगवान, ओमप्रकाश आदि का कहना है कि इससे उन्हें केवल दो प्रतिशत सिक्योरिटी राशि का लॉस होगा लेकिन अगर वो ये काम पूरे करते हैं तो इससे उन्हें काफी नुकसान होगा। ऐसे में अब नगर परिषद की करीब 20 ठेकेदार एजेंसी एकसाथ कामों से अपने हाथ पीछे खींचकर दो प्रतिशत राशि का ही लॉस उठाने को तैयार है। उनका तर्क है कि नए नियमों के हिसाब से उन्हें पांच की बजाय 12 प्रतिशत सेल्स टैक्स देना पड़ेगा। इतना ही नहीं अब इंटर लॉकिंग टाइलों की खरीद पर भी उन्हें अब 2 प्रतिशत टैक्स देना होगा जबकि इससे पहले यह महज 13.25 प्रतिशत था। अब अगर अलॉट हुए टेंडरों की बात करें तो करीब तीन करोड़ के विकास कार्य 30 अगस्त तक पूरे हो जाने थे लेकिन इनमें से करीब 50 लाख के कार्य ही अब तक पूरे हो पाए हैं। इसके बाद जीएसटी की नई दरें आते ही ज्यादातर ठेकेदारों ने निर्माण कार्यों को रूकवा दिया। इस बात से नगर परिषद अधिकारी भी अंजान नहीं है। उन्होंने ठेकेदारों के इस कदम को देखते हुए विकास कार्य पूरे करने के लिए नोटिस भी जारी किए हैं। हालांकि ठेकेदार नोटिसों के बावजूद पहले वाले तर्क पर ही अड़े हुए हैं। तीन चरणों में लगाए गए तीन करोड़ के टेंडरों के अलावा करीब 70 लाख के पेचिंग कार्य भी प्रभावित हुए है। इनके अलावा सीएम घोषणा के पांच करोड़ के टेंडर भी नगर परिषद अधिकारी लगाने की तैयारी में है।
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44 कार्यों में से 20 प्रतिशत पर ही काम शुरू
गत मई माह में नगर परिषद ने तीन चरणों में करीब तीन करोड़ के टेंडर लगाए थे। इनके तहत शहर के अलग-अलग वार्डों व क्षेत्रों में 44 गलियों व सड़कों का निर्माण होना था। इनमें से महज 20 प्रतिशत विकास कार्यों पर ही काम शुरू हुआ था कि इसके बाद जीएसटी की नई दरें लागू होते ही निर्माण कार्य बेहद धीमा हो गया। फिलहाल ठेकेदार नई जीएसटी दरों से विकास कार्य पूरे करवा पाने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं।
पांच करोड़ की सीएम घोषणा तक हो सकती हैं प्रभावित
सितंबर माह में सूबे के मुखिया मनोहर लाल खट्टर ने नगर परिषद को शहरी विकास के लिए पांच करोड़ देने की घोषणा की थी। इसके बाद नप अधिकारियों ने इस घोषणा में करवाए जाने वाले विकास कार्यों का खाका तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति के लिए हैड ऑफिस भेज दिया था। इस प्रोजेक्ट में शहर की पिछले कई वर्षों से खस्ता पड़ी सड़कों को शामिल किया गया था। इनके लिए जुलाई माह में टेंडर लगाने थे लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए तो ये टेंडर भी सिरे चढ़ते नजर नहीं आ रहें।
डंपिंग प्वाइंट व काठमंडी सड़क के जीर्णोद्धार में नहीं दिखाई रूचि
कुछ दिन पहले ही नगर परिषद रानियां वाला जोहड़ डंपिंग प्वाइंट की चारदीवारी व यहां तक सड़क निर्माण कराने की प्लानिंग तैयार की थी। इन दोनों कार्यों के लिए करीब 50 लाख के एस्टिमेट तैयार कर टेंडर लगाए थे। इसी दौरान काठमंडी सड़क की कायाकल्प व सौंदर्यीकरण के लिए भी करीब 43 लाख के टेंडर लगाए गए थे। जीएसटी की नई दरों को देखते हुए किसी भी एजेंसी ने इनके लिए आवेदन नहीं किया है। फिलहाल नगर परिषद ने ये टेंडर दोबारा लगाने पर रोक लगाई हुई है। नप अधिकारी जल्द ही प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का तर्क दे रहे हैं।
20 ठेकेदारों को मंद गति निर्माण कार्य पर नोटिस जारी
एक तरफ जहां ठेकेदारों ने विकास कार्य रोक दिए हैं तो वहीं नगर परिषद भी इस मसले पर सख्त नजर आ रही है। नगर परिषद अधिकारियों ने मौजूदा हालातों को देखते हुए 20 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस में उन्हें जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। नप अधिकारियों का कहना है कि अगर नोटिसों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो संबंधित ठेकेदार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी और यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
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अभी नई दरों पर हैड ऑफिस से आगामी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और विकास कार्यों को सिरे चढ़वा दिया जाएगा। हमने मंद गति से काम करने पर कुछ ठेकेदारों का नोटिस जारी किए हैं।
संजय यादव, सचिव नगर परिषद

जुलाई माह में हमें करीब पौने चार करोड़ रुपये के टेंडर लगाने हैं। इसमें कुछ सीएम घोषणाएं भी शामिल हैं। जल्द से जल्द हम टेंडर प्रक्रिया शुरू कर देंगे।
संजय छपारिया, चेयरमैन नगर परिषद
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