रोहतक। पीजीआईएमएस में बुधवार एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में दस अहम मुद्दों को रखा गया। इसमें ऑर्थो विभाग के डॉ. रामचंद्र सिवाच को अब ओपीडी करने की अनुमति दी गई है। वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित मान का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके अलावा डॉ. सिवाच व सर्जरी विभाग के डॉ. आरके कड़वासरा के मामले की जांच एक सेवानिवृत्त सेशन जज करेंगे।
सूत्रों के अनुसार बुधवार को कुलपति कार्यालय में ईसी की बैठक हुई। इसमें कुलपति, निदेशक, कुलसचिव, डीजीएचएस के प्रतिनिधि, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल सर्जन, डेंटल कॉलेज के प्राचार्य आदि मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट व एक पूर्व जांच अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर निलंबित चल रहे ऑर्थो विभाग के एचओडी डॉ. रामचंद्र सिवाच को संस्थान की टर्म एंड कंडीशन पर नियुक्ति दे दी गई है। इसके अनुसार डॉ. सिवाच कोई प्रशासनिक कार्य नहीं कर सकेंगे और वह एचओडी भी नहीं रहेंगे। चिकित्सक के पास ओपीडी में मरीज देखने, रिसर्च करने व कक्षा लेने की ही अनुमति होगी। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर निलंबित चल रहे डॉ. आरके कड़वासरा व डॉ. रामचंद्र सिवाच दोनों की जांच सेवानिवृत्त सेशन जज से कराने पर मुहर लगी है। इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन के सीनियर प्रोफेसर एवं एचओडी डॉ. ब्रिजेंद्र ढिल्लों के मामले में कहा गया कि निलंबित चल रहे डॉक्टर ने सवाल उठाया कि उन्हें कागजात नहीं सौंपे गए हैं। ऐसे में उन्हें जरूरी कागज दिए जाएंगे और दो सप्ताह बाद उनसे जवाब लिया जाएगा। इसके बाद अगली कार्रवाई तय होगी। इसके अलावा संस्थान में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के सुसाइड मामले पर चर्चा की गई। वहीं बैठक में एचओडी रोटेशनशिप का मामला एक बार फिर 15 दिनों के लिए टल गया है। यह अगली रेगुलर ईसी की बैठक में रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि इसमें सीनियर प्रोफेसर व प्रोफेसर को लेकर कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। अधिकारियों ने इस फैसले में गड़बड़ी न हो और जल्द बाजी न करते हुए इसे आगे के लिए टाल दिया। वहीं संस्थान में चर्चा रही कि चिकित्सक का निलंबन एक मंत्रालय के स्तर पर किया गया है। हालांकि इस चर्चा की कोई पुष्टि नहीं हो सकी है।
डॉ. अमित मान ने तीन माह की सैलरी का ड्राफ्ट सौंप दिया त्यागपत्र
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान को भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया था। डॉ. मान ने संस्थान को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट में केस डाला हुआ था। सूत्रों की मानें तो डॉ. अमित मान ने संस्थान को अपना त्यागपत्र और तीन माह की सैलरी का ड्राफ्ट अधिकारियाें को दिया था, इसे मंजूर कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि निलंबित चल रहे डॉ. मान को रिएस्टेट कर उनका त्यागपत्र मंजूर कर लिया गया है। हालांकि, अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में जब डॉ. अमित मान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह असुविधाओं के चलते सरकारी संस्थान में काम नहीं कर पा रहे थे। उनकी निजी लड़ाई से अधिक मरीजों को उनकी जरूरत है। इसलिए उन्होंने स्वयं अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है और भविष्य में वह मरीजों की सेवा करेंगे। गौरतलब है कि डॉ. अमित मान के त्यागपत्र देने से संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग में अब कोई नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं है। क्योंकि संस्थान में सिर्फ कुलपति डॉ. ओपी कालरा ही नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, जिनके जिम्मे प्रशासनिक कार्य अधिक हैं।