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अमर उजाला एक्सपोज : पीजीआईएमएस रोहतक की कारगुजारियों पर उठाए गंभीर सवाल

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प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति 13-14 दिसंबर 2017
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अमर उजाला एक्सपोज : पीजीआई रोहतक की कारगुजारियों पर उठे गंभीर सवाल ---
तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को बताया भ्रष्ट, इमरजेंसी मेडिसिन उपलब्ध नहीं, दवाओं के सैंपलों की भी रिपोर्ट नहीं

- एनएचआरसी ने चीफ सेक्रेटरी हरियाणा से छह सप्ताह में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
- राज्यसभा सांसद अविनाश राय की शिकायत पर 12 व 13 दिसंबर को किया था निरीक्षण
- सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी और संस्थान के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर उठाया सवाल

संजय कुमार
रोहतक।
नेशनल ह्यूूमन राइट कमीशन ने पीजीआई के औचक निरीक्षण के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट का खुलासा कर दिया। एनएचआरसी ने हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी को छह सप्ताह का समय देते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच टीम ने संस्थान के भ्रष्ट तीन वरिष्ठ डॉक्टरों और चंडीगढ़ सचिवालय में कार्यरत अधिकारियों के बीच सांठगांठ की भी बात कही है। टीम ने दवा काउंटरों पर वितरण व्यवस्था को छोड़ कर कई मामलों को गंभीरता से लिया है।

जुलाई 2014 में राज्यसभा सांसद अविनाश राय खन्ना की शिकायत पर एनएचआरसी की टीम ने 12 और 13 दिसंबर 2017 को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का औचक निरीक्षण किया था। टीम का नेतृत्व सहायक रजिस्ट्रार (लॉ) ओपी व्यास ने किया था और उनके साथ जांच में डीएसपी कुलबीर व आरपी गुप्ता शामिल थे। सूत्रों के अनुसार टीम की जांच रिपोर्ट ने सूबे के एक मात्र चिकित्सा संस्थान को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार संस्थान में निशुल्क दवा मिलती है और यहां 32 काउंटर कार्यरत हैं, इसे नियमित व अनियमित कर्मचारी चला रहे हैं। इसके अलावा सभी जीवनरक्षक दवाएं तक स्टॉक में नहीं मिलीं, कुछ दवा के डिब्बे तो खुले मिले, इनकी सही स्टोरेज नहीं थी। टीम ने संस्थान में सफाई व्यवस्था को सही बताते हुए उसे बेहतर करने को कहा है। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निरीक्षण में ओवरऑल व्यवस्था सही नहीं मिली है। इसमें तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। संस्थान की नाकामी के चलते मरीजों को दुर्गति सहनी पड़ रही है।
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कम रोशनी पर होते हैं ऑपरेशन
जांच टीम ने आपातकालीन विभाग के ऑपरेशन थियेटर में खराब बल्ब की समस्या पर कहा है कि डॉक्टर बगैर पर्याप्त रोशनी के ऑपरेशन करने पर मजबूर हैं। यह शिकायत एक डॉक्टर ने टीम को की थी, उसका कहना था कि प्रोफेसर इंचार्ज को बताने के बाद भी समस्या का हल नहीं हुआ। यह एक मरीज के साथ होने वाला मानवाधिकार का सबसे बड़ा हनन है। इसकी विजिलेंस जांच होनी चाहिए।

खुले आम लिए जाते हैं रुपये, डॉक्टर करते हैं प्राइवेट प्रेक्टिस
टीम ने सर्जरी विभाग के सीनियर डॉक्टर, ऑर्थो विभाग के सीनियर डॉक्टर और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉक्टर पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये तीनों सरकार संस्थान में होेते हुए प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं। सबको मालूम होने के बाद भी कोई इस पर कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार के सचिवालय में सांठगांठ होने के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कैंसर विभाग में तो मरीजों ने इसका मौखिक रूप से खुलासा भी किया है, लेकिन लिखित में देने से मना कर दिया। तीमारदारों ने बताया कि वार्ड में बगैर रुपये दिए कोई उपचार नहीं होता, मरीजों को धक्के मार कर भगा दिया जाता है। यह मानवता और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता के लिए घातक है। इस पर हर हाल में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

निजी कंपनियों पर उठाया सवाल, बताया घोटालेबाज
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संस्थान में चार निजी कंपनी कार्य करती हैं। इसमें इन्होंने 300:955:625:69 अनुपात की संख्या में अपने आदमी लगा रखे हैं। इनकी जांच के दौरान कोई रिकार्ड नहीं मिला। बार-बार जवाब मांगने के बाद भी इन्होंने कागज पेश नहीं किए। ये कंपनियां सरेआम अपने कर्मचारियों को लूट रही हैं। अंतिम बार इन कंपनियों की जांच 2015 में हुई थी। यहां कोई भी रिकार्ड नहीं है। कर्मचारियों को कोई सुविधा व भत्ता नहीं दिया जा रहा है। यहां एक कंपनी ने दो संस्थानों में घोटाला किया है। इस पर केस भी दर्ज है, इसे दबाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। इस पर तुरंत लेबर कमीशन और हरियाणा सरकार कार्रवाई करे।

सेक्सुअल ह्रासमेंट मामले में भी कोई गंभीर नहीं
सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी पर सवाल उठाते हुए जांच टीम ने कहा है कि यहां केस समय पर नहीं सुलझाए जाते हैं। फार्मेसी की छात्रा ने अगस्त 2017 में शिकायत की थी, जो अभी तक पेंडिंग है। आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद कोर्ट ने चार्जशीट लगाने के लिए कहा है, लेकिन संस्थान कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।

सीनियर रेजिडेंट और डेमोस्ट्रेटर की खाली सीट भरें
एक जनवरी 2017 से 30 नवंबर 2017 के बीच संस्थान में आने वाले मरीज की उपचार और मृत्यु का आंकड़ा पेश करते हुए टीम ने कहा है कि संस्थान में सीनियर रेजिडेंट और डेमोस्ट्रेटर की खाली सीटों को भरा जाए। इनकी कमी के चलते फैकल्टी के काम करने में समस्या हो रही है। इन सीटों के भरे जाने से समस्या का हल होगा।
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25 दवाओं के भरे जांच सैंपल, 19 की रिपोर्ट नहीं मिली
जांच टीम ने संस्थान के दवा की सेंपलिंग व्यवस्था पर सवाल उठाया है। बताया गया है कि जिला ड्रग कंट्रोलर ने जो दवाओं के सैंपल लिए उसमें सिर्फ दो बार सब स्टैंडर्ड मिले। रिकार्ड के अनुसार 25 में से 19 सैंपल की तो रिपोर्ट ही नहीं आई। इस पर संज्ञान लिया जाना चाहिए। इसके अलावा संस्थान में पानी के भी सैंपल नहीं हो रहे हैं।
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