- गेट नंबर एक और तीन के अलावा सड़क और आने जाने वाले रास्तों पर लगे रहे प्रचार में
- दिनभर बांटी किताबें, दोपहर में बांटा लंगर, रैली स्थल से दूर छोटे-छोटे समूहों बैठे रहे
- मंच से किया गया झंडे छोड़कर जाने का आह्वान, दोपहर 3 बजे से ही हो गई थी वापसी शुरू
अजीम अंसारी
रोहतक।
जसिया में रविवार को जाट महारैली में भारी संख्या में रामपाल समर्थक भी पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान पूरे समय वह प्रचार और पुस्तकें बांटने में लगे रहे। इस दौरान उन्होंने लंगर भी बांटा
सुबह रैली स्थल पर काफी कम लोग नजर आ रहे थे, साढ़े ग्यारह बजे के बाद भीड़ बढ़नी शुरू हुई। उनके साथ ही रामपाल समर्थक भी जसिया पहुंच रहे थे। समर्थक रोहतक और आसपास के शहरों के अलावा दिल्ली और अन्य जगहों से भी आये थे। आने के बाद कुछ गाड़ियां पार्किंग में चली गईं और बाकी सड़क किनारे ही अपनी जगह बनाने लगीं। इस दौरान करीब 20 बसें और 50 से अधिक छोटे वाहन सड़कों के आसपास जमा हो गए। रामपाल समर्थक तीनों गेटों और मंच के रास्ते पर आने-जाने वालों को किताब ‘जीने की राह’ बांटने लगे। एक और तीन नंबर गेट पर रामपाल समर्थक ज्यादा नजर आ रहे थे।
खेतों में सिमरन, भाषण से बेपरवाह
रामपाल समर्थकों के साथ आयी महिलाएं और बच्चे सभा स्थल से दूर खेतों में बैठे थे। काफी लोग रैली में भी पीछे की ओर बैठे थे। जो सेवा नहीं कर रहे थे वह भी वहां आ-जा रहे थे। छोटे-छोटे समूहों में बैठे समर्थक धीमी आवाज में सिमरन कर रहे थे। उन्हें परवाह भी नहीं भी की मंच से क्या बोला जा रहा है।
दोपहर को डेढ़ से बांटना शुरू किया लंगर
रामपाल समर्थक प्रचार के लिए दिनभर अपनी पुस्तक ‘जीने की राह’ बांटते रहे। हर आने जाने वाले से किताब लेने और पढ़ने का अनुरोध कर रहे थे। समर्थकों मेें बुजुर्ग, महिलाएं और उनके साथ बच्चे भी थे। दोपहर डेढ़ बजे से उन्होंने लंगर बांटना शुरू किया। लंगर में प्लास्टिक की थैली में बंधे पांच पराठे और मिर्च का अचार था जो वह सभी को दे रहे थे।
सड़क किनारे वाहन, हाथ में किताबें
जसिया में जितने समय कार्यक्रम चला ज्यादातर समर्थक गेट नंबर एक के आसपास डटे रहे। हाथ में किताबें थीं और लोगों से इसे लेने और पढ़ने का आग्रह कर रहे थे। सड़क किनारे भी समर्थक खड़े थे जो वाहनों में बैठे लोगों को किताबें बांट रहे थे।
झंडे छोड़कर जाने का आह्वान
समर्थकों ने करीब तीन बजे से ही वहां से निकलना शुरू कर दिया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजकों ने समर्थकों से अपने झंडे वहीं छोड़कर जाने का आह्वान किया। हालांकि समर्थक अपने अंदाज में ही रामपाल के जयकारे बोलते हुए वहां से निकले।