फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रात्रि में तापमान के गिरते ही बढ़ जाता है स्मॉग

विज्ञापन
विज्ञापन
रात्रि में तापमान के गिरते ही बढ़ जाता है स्मॉग
विज्ञापन

- सरकार फेल, वरुण और वायु देव से उम्मीद
- बुधवार को दिन में प्रदूषण 220 और रात में पहुंचा 400 माइक्रोन
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
स्मॉग का कहर तीसरे दिन भी जारी है। इससे आम जनता को बचाने के लिए के सरकार के सभी तंत्र फेल हो चुके हैं। दिन में भले ही चंद घंटों के लिए स्मॉग से राहत मिलती हो, लेकिन जैसे ही रात होती है और तापमान गिरता है, स्मॉग का असर वातावरण में बढ़ता चला जाता है। अब सभी को इस समस्या से निजात पाने के लिए वरुण और वायु देवता से ही उम्मीद है। क्योंकि तेज हवा के चलने और बरसात होने के बाद ही इस समस्या से राहत मिल सकती है। जब तक ऐसा नहीं होता स्मॉग का स्तर हर दिन बढ़ता चला जाएगा।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय स्थित मौसम विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजेश धनखड़ के अनुसार बुधवार को दिन में वातावरण में प्रदूषण का स्तर 220 माइक्रोन तक पहुंच गया था। कुछ समय हवा चलने और दिन में तापमान बढ़ने से प्रदूषण ऊपर चला गया। लेकिन शाम ढलते ही तापमान गिरने लगा और सारा प्रदूषण वापस जमीन पर आ गया। रात को प्रदूषण 400 माइक्रोन के आसपास पाया गया।
विज्ञापन


पराली, फाने जलाना जारी
प्रदूषण कम करने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। खेतों में पराली और फानों का जलाया जाना जारी है। स्मॉग के चलते धीमी हुई वाहनों की गति ने भी प्रदूषण का स्तर और बढ़ाया है। शहर में सबसे अधिक प्रदूषण ऑटो और कंस्ट्रक्शन के चलते हो रहा है। महिला अधिकारी ने बताया कि दिन में अधिकतम तापमान 29-30 डिग्री रहता है, जबकि रात को तापमान गिरकर 16-17 डिग्री पहुंच जाता है। इस गहरे अंतर के चलते स्मॉग से राहत मिलने की अभी उम्मीद नहीं है। वहीं मौसम विभाग की मानें तो अभी आने वाले दिनों में बरसात होने की उम्मीद नहीं है। दिन और रात के तापमान में अंतर बना रहेगा, इसलिए स्मॉग से बचने की उम्मीद नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि आमजन प्रदूषण उत्पन्न करने वाले कार्याें से बचें।

खेतों में सिंचाई भी बनेगी समस्या
एक्सपर्ट बताते हैं कि खेतों में किसानों द्वारा पराली जलाने से स्मोक उत्पन्न हो रहा है। अभी यदि किसान सिंचाई करते हैं तो आग की गर्मी से सिंचाई का पानी फॉग बन जाएगा। जिससे प्रदूषण नीचे ही जम जाएगा। दोनों मिलकर स्मॉग की समस्या को और बढ़ाएंगे। वहीं किसानों की मानें तो उनके पास पराली जलाने के अलावा कोई चारा नहीं है। वहीं यदि वह खेतों में सिंचाई नहीं करेंगे तो उनके गन्ने की फसल खराब हो जाएगी। यदि वह गन्ना देरी से बोएंगे तो उसकी गुणवत्ता में कमी आएगी। सरकार को पराली के संबंध में पहले ही विकल्प तलाशना चाहिए था। जिन किसानों के पास कई एकड़ जमीन है, वह कितनी पराली काट सकते हैं। उनके पास इसे जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

सुबह-शाम-रात को न करें आउट डोर एक्टिविटी
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में पुलमोनारी क्रिटिकल केयर यूनिट के विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी के अनुसार स्मॉग मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा है। कुछ घंटे इसमें सांस लेने का मतलब कई सिगरेट पीने जैसा है। इसलिए सुबह-शाम और रात के समय आउट डोर एक्टिविटी से बचें, क्योंकि इस समय स्मॉग का स्तर उच्च होता है। खुले में सैर करने वाले व्यक्ति और ओपन ग्राउंड में खेलने वाले युवाओं को इन दिनों इनडोर एक्टिविटी ही करनी चाहिए। इसके बावजूद जो आउटडोर एक्टिविटी ही करना चाहता है वह बगैर स्पेशल मास्क के बाहर न जाएं। एक्सरसाइज करने वाले के लिए थ्री लेयर और एन-95 मास्क भी नाकाफी है। बाजार में विभिन्न कंपनियों के मास्क उपलब्ध हैं, घर से बाहर निकलते वक्त इनका प्रयोग करें। वहीं चिकित्सक ने बताया कि खिलाड़ियों के हिसाब से बाजार में दो से ढाई हजार रुपये का वॉशेबल मास्क उपलब्ध है, यदि वह बाहर जाना ही चाहते हैं तो इसके बिना न जाएं।
विज्ञापन


एंबुलेंसों पर बढ़ा वर्क लोड
स्मॉग के चलते सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। सोमवार रात से बुधवार सायं तक 108 नंबर कंट्रोल रूम में 149 से अधिक कॉल सुनी गई, इसके बाद यहां एंबुलेंस भेजी गई। बुधवार सुबह आठ बजे से एक घंटे के अंदर ही 15 स्थानों पर एंबुलेंस को भेजना पड़ा। विभाग की मानें तो दो दिनों में एंबुलेंस डिमांड बढ़ी है, यह सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुणा अधिक है। वहीं एंबुलेंस सेवा में तैनात स्टाफ की मानें तो वह मरीज को लाने के लिए विभिन्न टोल प्लाजा पर खड़ी एंबुलेंसों का भी जरूरत पड़ने पर प्रयोग कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें