अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सूबे में भले ही डॉक्टरों की किल्ल्लत चल रही हो, लेकिन पीजीआई में डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति के बाद एक्सटेंशन की फाइलों पर राजनीति जारी है। यहां संस्थान के पीवीसी एवं चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वीके जैन सेवानिवृत्त हो गए हैं। डॉक्टर की फाइल सरकार के पास एक्सटेंशन के लिए भेजी गई है, लेकिन दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी जवाब नहीं आया है। जबकि कुछ मामलों में महज दो दिन में सरकार की ओर से एक्सटेंशन की हरी झंडी मिली है।
डॉ. जैन ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि वह मूलरूप से भिवानी के बिचला बाजार के निवासी हैं, लेकिन 47 साल से वह पीजीआई में ही हैं। 1970 में उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला लिया, इसके बाद एमडी संस्थान से ही की और विभिन्न पदों पर रहते हुए सात साल डीन के पद पर रहे। अभी तीन साल से उनके पास पीवीसी का पद है और चार माह के लिए उन्होंने कार्यवाहक कुलपति का कार्यभार संभाला। डॉॅ. जैन ने बताया कि सरकार के नियमानुसार उन्हें ढाई साल की एक्सटेंशन मिल सकती है, लेकिन उनकी फाइल अभी सरकार के पास विचाराधीन है। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपना सारा समय संस्थान को दिया, जिसके बदले संस्थान ने भी उनको सबकुछ दिया है। उन्होंने चर्मरोग विभाग में लेजर सुविधा, ट्रांसप्लांट और कई आधुनिक सुविधाएं शुरू करवाई। वह 2005 में एमसीआई के सदस्य रहे और अब सेवानिवृति के दौरान भी वह इसके सदस्य हैं। अधिकारी ने बताया कि संस्थान में चर्म रोग की ओपीडी प्रतिदिन 700 से 800 मरीजों की है, इसमें वह रोजाना 120 मरीजों की जांच करते थे। इसके साथ वह अपना पीवीसी का कार्य भी देखते थे।
राजनीति की भेंट चढ़ रहे दो डॉक्टर
हाल ही में पीजीआई से दो डॉक्टर सेवानिवृत्त हुए हैं और ये दोनों राजनीति का शिकार हो रहे हैं। बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरबी सिंह को एक्सटेंशन दिलाने के लिए संस्थान ने तेजी दिखाई, लेकिन उनके विरोधी उन पर हावी हो गए। डॉ. सिंह की नियुक्ति से पहले ही कर्मचारी और छात्र नेताओं ने बवाल काट दिया। दूसरी ओर डॉ. वीके जैन की फाइल सरकार के पास अटकी हुई है। सूत्रों की मानें तो संस्थान ने जानबूझ कर पीवीसी की फाइल समय पर नहीं भेजी, जब दबाव बना तो फाइल भेजी और अब इस पर जवाब ही नहीं आ रहा है। इस संबंध में डॉ. वीके जैन ने बताया कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है, शायद संस्थान और सरकार को उनकी जरूरत नहीं होगी। इसके चलते उनकी एक्सटेंशन फाइल को मंजूर नहीं किया गया। वह नियमानुसार अभी ढाई साल की एक्सटेंशन ले सकते हैं।
50 पैसे से 25 रुपये हो गया परांठा
डॉ. वीके जैन ने अपने कालेज के दिन याद करते हुए कहा कि वर्तमान में जो कैंटीन है, वहां पहले ओपन में ढाबे होते थे। यहां 1970 में 50 पैसे में परांठा, मक्खन और दही मिलता था। अब यहों 25 रुपये में परांठा ही मिलता है। पहले कोई परांठे की क्वालिटी को लेकर चिंतित नहीं होता था, आज स ाी एक बार सोचते हैं कि खाना हाइजैनिक होगा या नहीं।