सांडों को पकड़ने में नप कर्मियों के छूटे पसीने
भिवानी। नगद परिषद अधिकारियों ने बिना संसाधन और बिन अनुभवी कर्मचारियों की मदद से लावारिस सांडों को पकड़ने का अभियान शुरू किया। नतीजा यह रहा कि कर्मचारी सांडों की टक्कर से बाल-बाल बचे। सांड काबू नहीं कर पाने पर नप अधिकारियों ने गोसेवकों की मदद ली। गोसेवकों की मदद से बड़े सांड काबू कर नंदीशाला पहुंचाए गए। अब तक 18 सांडों को शहर से पकड़ हालुवास गेट पर बनाई नंदीशाला में पहुंचाया गया।
कोर्ट ने भी जिला प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि एक माह में शहर की सड़कों पर लावारिस पशु दिखने नहीं चाहिए। शहर में लावारिस पशु प्रति दिन हादसों का सबब बन रहे हैं। अब तक लावारिस पशु करीब आधा दर्जन की जान ले चुके हैं तो कइयों को अस्पताल पहुंचा चुके हैं।
वैकल्पिक तौर पर शहर वासियों को राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हालुवास गेट रेलवे लाइन के पार मत्स्य विभाग की जमीन में करीब दो एकड़ में नंदीशाला बनाई गई है।
शनिवार से शहर में लावारिस पशु पकड़ने का काम शुरू हुआ लेकिन अनुभव नहीं होने के कारण नप कर्मचारियों के लिए यह आफत भरा रहा। नप अधिकारियों के पास संसाधनों की कमी भी साफ झलकी। पहले दिन सिर्फ छोटे चार-पांच माह तक के बछड़े ही पकड़े जा सके। लावारिस सांड काबू में नहीं आने की सूरत में नगर परिषद अधिकारियों-कर्मचारियों ने गोसेवकों की मदद ली।
रविवार को गोसेवकों ने लावारिस सांड पकड़ने का जिम्मा संभाला। गोवसेवकों ने बंसीलाल पार्क के पास और दादरी गेट चौक के पास से पांच सांडों को पकड़ नंदीशाला पहुंचाया। अब तक कुल 18 सांडों को पकड़कर नंदीशाला पहुंचाया जा चुका है। नगद परिषद से सेनेटरी इंस्पेक्टर विकास ने बताया कि लावारिस सांडों को पकड़कर नंदीशाला में रखा जा रहा है। गोसेवक संजय परमार ने बताया कि नप अधिकारियों ने लावारिस सांड़ों को पकड़ने के लिए मदद मांगी थी। इसके बाद पांच सांड़ों को पकड़कर नंदीशाला में पहुंचाया गया है। ट्रैक्टर में खराबी आने के कारण अभियान बीच में रोकना पड़ा। साड़ों को पकड़ने में बंसी, गौरव, टोनी, धीरज मोटू, जोनी, नर्सी, नवीन, मुकेश, सचिन, धोलू आदि ने सहयोग किया।