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इंप्लांट जब्त होने के बाद अब उजागर हो रही डॉक्टरों व निजी लैबों की सांठगांठ

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इंप्लांट जब्त होने के बाद अब उजागर हो रही डॉक्टरों व निजी लैबों की सांठगांठ
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-मेडिसन के वार्ड में पकड़ा निजी लैब का कारिंदा, मरीज का लेने आया था सैंपल
-डॉक्टरों का कहना-जब संस्थान में जांच सुविधा नहीं तो क्या मरीज बाहर जाए
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस निजी केमिस्टों व निजी लैब संचालकों के मकड़जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है। इन आरोपों को अब स्वयं संस्थान का प्रशासन ही सिद्ध कर रहा है, जबकि अब तक अधिकारी इन आरोपों का हमेशा से खंडन करते आ रहे थे। शुक्रवार को मेडिसन वार्ड में एक निजी लैब के कारिंदे को मरीज का ब्लड सैंपल लेते हुए पकड़ा गया है।
वार्ड नौ मेडिसन विभाग में आए जयभगवान को संस्थान के सुरक्षा अधिकारियों ने शुक्रवार को 11 खाली ट्यूब के साथ धर लिया। उक्त कर्मचारी ने उस समय तक वार्ड में दो मरीजों का रक्त सैंपल के लिए भर लिया था। पूछताछ में कर्मचारी ने बताया कि उसे एक डॉक्टर ने रक्त का सैंपल लेने के लिए बाहर से बुलाया था। हालांकि, कर्मचारी ने कहा कि इस बार उसे छोड़ दिया जाए, वह भविष्य में फिर से नहीं आएगा। गौरतलब है कि इंप्लांट सप्लायर, निजी लैब, निजी दवा कंपनियों के एजेंट संस्थान में बेरोकटोक घूमते हैं। कुछ डॉक्टरों से मिलकर ये मरीजों को मोटा चूना भी लगाते हैं। इस बात को कुछ दिन पहले पूर्व निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग के एसीएस के समक्ष भी माना था और आश्वासन दिया था कि वह इन पर लगाम लगाएंगे। अब प्रशासन ने सख्ती करनी शुरू कर दी है और पहले इंप्लांट सप्लायरों पर शिकंजा कसा और अब निजी लैब वालों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है।
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इंप्लांट मामले में दूसरी कमेटी करेगी जांच
एक ओर इंप्लांट सप्लायर दबाव बना रहे हैं कि उनका लाखों का जब्त सामान उन्हें लौटाया जाए। दूसरी ओर पहली जांच कमेटी ने अपना जवाब दाखिल करते हुए दूसरी कमेटी का गठन करने की सिफारिश की है कि जब्त सामान किसका था इसे तय करने के लिए कमेटी का गठन होना चाहिए। यदि कोई अपना पक्का बिल देता है तो उसे सामान लौटाने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन सूत्रों की मानें तो जब्त सामान में अधिकांश का पक्का बिल नहीं है। वहीं संस्थान में चर्चा है कि अधिकांश सामान डॉक्टराें का स्वयं का हो सकता है।

चीफ विजिलेंस अधिकारी को सौंपी जा सकती है जांच
संस्थान में अस्थि रोग विभाग के डॉक्टरों की जांच करने से कई सीनियर डॉक्टर परहेज कर रहे हैं। ऐसे में जब्त सामान पर सीधा कार्रवाई करना अधिकारियों के बस में भी नहीं हो रहा है और वह इस सामान को अब छोड़ भी नहीं सकते। इसके चलते माना जा रहा है कि यह जांच संस्थान की ज्वाइंट डायरेक्टर आईएएस अधिकारी कर सकती हैं। महिला अधिकारी को सरकार ने चीफ विजिलेंस अधिकारी की जिम्मेदारी भी दी है।

सीसीटीवी की जद में संस्थान की हो रही सख्त मॉनीटरिंग
संस्थान में इंप्लांट सप्लायरों, निजी लैब के कारिंदों, दवा कंपनियों के एमआर व निजी अस्पताल के दलालों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए हैं। इसमें मॉनीटरिंग कर ऐसे लोगों को सबूत के साथ पकड़ने की तैयारी है।
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संस्थान में किसी भी प्रकार का गलत कार्य नहीं होने दिया जाएगा। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करेगा तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नियमों का सख्ती से पालन करें। यहां आने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है।
-डॉ. नित्यानंद शर्मा, निदेशक, पीजीआईएमएस
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