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अमर उजाला ने उठाया इंप्लांट का मुद्दा तो एसीएस ने लिया संज्ञान

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अमर उजाला ने उठाया इम्प्लांट का मुद्दा तो एसीएस अमित झा ने तत्काल लिया संज्ञान, बोले
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पीजीआईएमएस में एक माह के अंदर खुलेगा ‘अमृत स्टोर’ व ‘जनऔषद्यालय’

फोटो एसएनजे एक के साथ अमर उजाला की ओर से उठाए गए पत्र को भी अवश्य प्रकाशित करें।

-दिल्ली, चंडीगढ़ व राजस्थान की तर्ज पर रोहतक में भी मिलेगा सस्ता इम्प्लांट
-सर्जरी, ऑर्थो, कार्डियोलॉजी, कैथ लैब, नेत्र, सीटीवीएस के मरीजों को मिलेगी राहत

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में मरीजों को अब महंगे इम्प्लांट नहीं खरीदने होंगे। डॉक्टरों व निजी केमिस्ट शॉप का 40 से 60 फीसदी लगने वाला कट कमीशन जल्द ही बंद हो जाएगा। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अमित झा ने अमर उजाला के उठाए सवाल पर तत्काल कार्रवाई करते हुए निर्देश दिए कि संस्थान में एक माह के अंदर अमृत स्टोर खुल जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारी ने मौके पर ही एचएलएल लाइफ केयर अमृत के चेयरमैन से बात कर इसकी पुष्टि भी कर दी। साथ ही अधिकारी ने संस्थान में जन औषद्यालय भी खुलवाने की बात कही।
स्वास्थ्य विभाग के एडमिनिस्ट्रेशन सेक्रेटरी अमित झा ने संस्थान में उपचार के लिए आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की राह को आसान कर दिया है। अब संस्थान में भी पीजीआईएमएस चंडीगढ़, एम्स दिल्ली व राजस्थान की तर्ज पर अमृत स्टोर से तय कीमत पर सस्ते इम्प्लांट मिल सकेंगे। इनका प्रयोग सर्जरी, ऑर्थो, कार्डियोलॉजी, कैथ लैब, सीटीवीएस आदि विभागों में होता था। यहां डॉक्टर और निजी केमिस्ट मिलकर कट कमीशन का खेल खेलते थे और मरीजों को महंगे इम्प्लांट खरीदने के लिए मजबूर करते थे। अमर उजाला के उठाए सवाल पर अधिकारी ने माना कि इम्प्लांट में गड़बड़ी की कई जगह से शिकायत आती हैं, इसलिए अमृत स्टोर प्रदेश के अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी स्थापित कराया जाएगा। अधिकारी ने मौके पर कहा कि अमृत स्टोर को जनहित में संस्थान में जगह दो, यदि स्टोर निशुल्क भी खुलवाना पडे़ तो खुलवा दो। इस संबंध में जब कार्यकारी कुलपति डॉ. रोहताश यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके पास एक दुकान खाली है वह अमृत स्टोर के लिए अलॉट कर देंगे।
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इस पत्र को देखने के बाद अधिकारी ने लिया फैसला
संस्थान में कई मंत्री व कई प्रशासनिक अधिकारी आए, लेकिन मरीजों की समस्या का समाधान सीधे तौर पर कोई नहीं कर पाया। शुक्रवार को जब अधिकारी के समक्ष आर्थो विभाग के एमएस कार्यालय की ओर से मंजूर इम्प्लांट का प्रोफार्मा रखा गया तो वह भी हैरान हो गए। इसमें कई निजी कंपनियों का नाम बाकायदा लिखा गया था और डॉक्टर के हस्ताक्षर भी थे। बातचीत में स्वयं निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता ने भी माना कि संस्थान में इम्प्लांट से संबंधित एजेंट घूमते रहते हैं। ये मरीज को खुद प्रभावित करते हैं। इसे सीधे रोक पाना संभव नहीं है। इस पर अधिकारी ने पहले तो अमृत स्टोर खुलवाने के लिए 15 दिन का समय मांगा, फिर एचएलएल से बात करने के बाद एक माह का समय लिया। अधिकारी ने फोन पर स्पष्ट कहा कि वह मीडिया को जुबान दे चुके हैं, इसलिए इस कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। अधिकारी को दिखाए पत्र पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद ने बताया कि यह पत्र उनके समय का नहीं पूर्व के एमएस के समय जारी हुआ है और उससे पल्ला झाड़ लिया।
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