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नालायक और लुटेरे डॉक्टर नहीं, बल्कि सरकार सिस्टम है

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पीजीआईएमएस के डॉक्टर कुलबीर जाखड़ ने सोशल मीडिया पर छेड़ी मुहिम, कहा
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‘नालायक और लुटेरे डॉक्टर नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम है’

सोशल मीडिया की फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सोशल मीडिया फेसबुक पर पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. कुलबीर जाखड़ ने एक मुहिम छेड़ते हुए वीडियो जारी किया है कि नालायक और लुटेरे डॉक्टर नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम है। डॉक्टर का कार्य मरीज का उपचार करना है, दवा की कीमत तय करना तो सरकार और सिस्टम का कार्य है। डॉक्टर को यदि पूरी दवा अंदर नहीं मिलती तो क्या वह मरीज को बगैर ठीक दवा दिए वापस लौटा दे।
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वीडियो में डॉ. जाखड़ ने सवाल उठाया है कि सरकार का फरमान है कि सरकारी डॉक्टर को बाहर की दवा नहीं लिखनी और डॉक्टरों को चंद दवाएं देकर कह दिया कि काम चलाओ। ऐसे में तो मरीज का स्वास्थ्य सुधरने से रहा। आधी दवाएं दे कर मरीज को कैसे घर लौटा दें। जब मरीज को अस्पताल में निशुल्क दवा नहीं मिलती तो डॉक्टरों पर आरोप लगने शुरू हो जाते हैं। कोई सरकार को क्यों नहीं कहता कि जितनी दवा डॉक्टर को चाहिए, उतनी दवा क्यों नहीं भिजवाते। यदि अस्पताल में पूरी दवाएं हों और डॉक्टर बाहर की दवा लिखे तो उसे कोई भी सजा दे दो। स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो वहां तीन दिन की दवा देने का नियम है, जबकि मरीज को दवा पांच दिन की देनी जरूरी होती है। नतीजा यह होता है कि मरीज तीन दिन की दवा खाकर सही हो जाता है और वापस दवा लेने नहीं आता। ऐसे में दवा के प्रति रजिस्टेंट्स पैदा हो जाता है और वह काम नहीं करती है। इस पर उसे दूसरी दवा देना जरूरी हो जाता है। अगली लिखी जाने वाली दवा महंगी होती है, फिर डॉक्टर पर आरोप लगता है कि उसने महंगी दवा लिखी है। सरकार निजी दवा कंपनियों को लूटने की छूट देती है, यदि वह इनकी कीमत तय कर दें तो कहीं कोई समस्या ही न हो। कुछ डॉक्टर कमीशन के चक्कर में बाहर की महंगी दवाएं लिखते हैं, लेकिन बदनाम सभी होते हैं।
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